कालिख, चप्पल और सियासत! लखनऊ में मेयर के घर के बाहर हंगामा

कालिख पोती गई… चप्पल चली… और सियासत सुलग उठी। लखनऊ की एक गली में जो हुआ, उसने पूरे यूपी का पारा चढ़ा दिया। सवाल अब सिर्फ विरोध का नहीं—मर्यादा बनाम राजनीति का है। मेयर के घर के बाहर हंगामा: विरोध ने पकड़ा उग्र रूप Lucknow में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब Samajwadi Party के एक कार्यकर्ता ने मेयर Sushma Kharkwal के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मेरठ निवासी गौरव चौधरी ने घर के बाहर कालिख पोती। नेमप्लेट पर चप्पल मारकर विरोध जताया। कुछ देर के लिए इलाके में तनाव का…

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केदारनाथ के कपाट खुले—भक्ति में डूबा देश, CM धामी की विशेष पूजा

हिमालय की ठंडी हवा में आज सिर्फ बर्फ नहीं, आस्था बह रही थी। जैसे ही कपाट खुले—हर दिल “हर हर महादेव” में डूब गया। ये सिर्फ एक मंदिर नहीं… करोड़ों भावनाओं का दरवाजा है। केदारनाथ के कपाट खुले: आस्था का विस्फोट Kedarnath Temple में आज सुबह वह ऐतिहासिक पल आया, जिसका इंतजार देशभर के श्रद्धालु कर रहे थे। विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही बाबा केदारनाथ के कपाट खुले, पूरा परिसर “हर हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में आंसू और चेहरे पर सुकून…

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नाम पूछकर गोलियां… 1 साल बाद भी सिहराता पहलगाम! PM का बड़ा संदेश

नाम पूछा गया… धर्म पूछा गया… और फिर गोलियां चला दी गईं। एक साल बीत गया, लेकिन उस दिन की चीखें आज भी घाटी की हवा में गूंजती हैं। सवाल आज भी जिंदा है—क्या हम कभी ऐसे जख्म भूल सकते हैं? पहलगाम की वो काली दोपहर, जिसने देश हिला दिया Pahalgam की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को जो हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने सैलानियों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग की। 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई—वो लोग जो सिर्फ छुट्टियां मनाने आए…

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मार्च या ट्रैफिक महाभारत? लखनऊ की सड़कों पर ‘जाम का चक्रव्यूह’

सड़कें रुकीं… शहर थमा… और सिस्टम बेनकाब हो गया। लखनऊ आज एक रैली नहीं, बल्कि अव्यवस्था की लाइव स्क्रीनिंग बन गया। क्या ये महिला अधिकारों की लड़ाई थी… या आम जनता की परीक्षा? एक तरफ नारे गूंज रहे थे…दूसरी तरफ गाड़ियों में बैठे लोग पसीने और गुस्से में उबल रहे थे। और सबसे दर्दनाक—जिंदगी बचाने वाली एम्बुलेंस भी इस ‘जाम’ में कैद थी। पीक आवर्स में पॉलिटिक्स: शहर बना शिकार लखनऊ की सड़कों पर आज भीड़ नहीं, chaos बह रहा था। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निकले महिला मार्च ने ट्रैफिक…

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फडणवीस vs राऊत—कानून पास, फिर भी क्यों सुलग रहा है महिला आरक्षण?

कानून पास हो चुका… फिर भी सड़कों पर जंग क्यों जारी है? मुंबई में एक सभा, और पूरा महाराष्ट्र सियासी बहस के भंवर में खिंच गया। क्या ये महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है… या चुनावी कहानी का नया अध्याय? वर्ली में माइक उठा, तो दिल्ली की बहस भी फिर जिंदा हो गई। एक तरफ सत्ता की चुनौती, दूसरी तरफ विपक्ष का फैक्ट-बॉम्ब। और बीच में खड़ा मतदाता—जिसे समझ नहीं आ रहा कि सच कौन बेच रहा है। वर्ली की सभा: सियासत का लॉन्चपैड वर्ली में महायुति की रैली सिर्फ…

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बेटी की हत्या कर चेहरा मिटाया, फिर खुद दर्ज कराई गुमशुदगी

एक पिता… जिसने बेटी को जन्म दिया, उसी ने उसकी जिंदगी छीन ली। और फिर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… उसने सच्चाई को मिटाने की कोशिश भी की। क्या शक इतना खतरनाक हो सकता है कि इंसान रिश्तों का गला घोंट दे? लखनऊ से आई ये घटना सिर्फ एक क्राइम नहीं…समाज के टूटते भरोसे की खामोश चीख है। हत्या: जब शक ने इंसानियत को हराया यहां हत्या हथियार से नहीं… सोच से हुई। आरोपी पिता ने अपनी नाबालिग बेटी का गला घोंटकर हत्या कर दी। कारण?सिर्फ एक शक — कि बेटी…

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टकराया विमान, आग का गोला बना… जशपुर हादसे ने हिला दिया देश

आसमान से गिरा एक आग का गोला… और जंगल में छा गया सन्नाटा। कुछ ही सेकंड में उड़ान खत्म… और जिंदगी भी।क्या ये हादसा था… या चेतावनी, जिसे हमने फिर नजरअंदाज कर दिया? जशपुर के आरा पहाड़ी इलाके में सोमवार को जो हुआ, वो सिर्फ एक दुर्घटना नहीं… एक खामोश त्रासदी है। हादसा: पहाड़ी से टकराया विमान उड़ान सामान्य थी… लेकिन अंत असामान्य। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक निजी चार्टर्ड विमान आरा पहाड़ी के ऊंचे हिस्से से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमान तुरंत आग के गोले में बदल गया। पायलट और…

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भक्ति, रोशनी और जयघोष… परशुराम जयंती बनी आस्था का महासागर

लखनऊ में हर तरफ “जय परशुराम” का जयघोष… और ऐसा माहौल, जैसे शहर एक मंदिर बन गया हो। क्या खास था इस आयोजन में, जिसने हजारों लोगों को एक साथ जोड़ दिया? 19 अप्रैल 2026… कृष्ण नगर का सहसोवीर मंदिर सिर्फ एक स्थान नहीं रहा, बल्कि आस्था, परंपरा और एकता का जीवंत मंच बन गया।यहां भक्ति सिर्फ गाई नहीं गई… महसूस की गई। भक्ति से सजी शाम: माहौल बना दिव्य शुरुआत ही ऐसी थी, जिसने माहौल को बदल दिया। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और सजी हुई रोशनी — मंदिर परिसर किसी आध्यात्मिक उत्सव…

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महंगाई रुकी या तूफान से पहले शांति? LPG दामों पर बड़ा खेल!

आज गैस सिलेंडर के दाम नहीं बढ़े… और यही सबसे बड़ी खबर है। क्योंकि इस दौर में “ना बढ़ना” ही सबसे बड़ा सरप्राइज बन चुका है। लेकिन सवाल ये है — क्या ये राहत है या तूफान से पहले की खामोशी? 19 अप्रैल, रविवार… देशभर में LPG सिलेंडर के रेट स्थिर हैं। लेकिन इस स्थिरता के पीछे जो कहानी है, वो आम आदमी की जेब और सरकार की रणनीति दोनों को उजागर करती है। आज के दाम: जेब पर कितना असर? राहत दिखती है… लेकिन सच्चाई थोड़ी कड़वी है। घरेलू LPG सिलेंडर…

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मोदी का वार — नारी शक्ति के सपनों पर ताली बजाने वालों को देश देख रहा है!

रात के ठीक 8 बजे… स्क्रीन पर एक चेहरा, और देश की सांसें थमी हुईं। जब प्रधानमंत्री बोलते हैं, तो सिर्फ शब्द नहीं निकलते — नीति बनती है, दिशा तय होती है, और कभी-कभी सियासत की आग भी भड़क उठती है। इस बार मुद्दा था — नारी शक्ति, लेकिन निशाने पर पूरा विपक्ष आ गया। राष्ट्र के नाम संबोधन या राजनीतिक संदेश? Narendra Modi का हर राष्ट्र संबोधन सिर्फ एक भाषण नहीं होता — यह एक signal होता है। देश के लिए, विपक्ष के लिए, और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम…

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