भक्ति, रोशनी और जयघोष… परशुराम जयंती बनी आस्था का महासागर

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

लखनऊ में हर तरफ “जय परशुराम” का जयघोष… और ऐसा माहौल, जैसे शहर एक मंदिर बन गया हो। क्या खास था इस आयोजन में, जिसने हजारों लोगों को एक साथ जोड़ दिया? 19 अप्रैल 2026… कृष्ण नगर का सहसोवीर मंदिर सिर्फ एक स्थान नहीं रहा, बल्कि आस्था, परंपरा और एकता का जीवंत मंच बन गया।
यहां भक्ति सिर्फ गाई नहीं गई… महसूस की गई।

भक्ति से सजी शाम: माहौल बना दिव्य

शुरुआत ही ऐसी थी, जिसने माहौल को बदल दिया। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और सजी हुई रोशनी — मंदिर परिसर किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं लग रहा था। फूलों और लाइट्स की सजावट ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

भगवान परशुराम जी का विशेष श्रृंगार किया गया, और महंत दिव्या गिरी ने विधि-विधान से आरती संपन्न कराई। जब आस्था सजती है… तो वातावरण खुद-ब-खुद पवित्र हो जाता है।

5 साल का सफर: मंदिर बना आस्था का केंद्र

हर मंदिर सिर्फ पत्थरों से नहीं बनता…वो बनता है विश्वास से। इस मंदिर का निर्माण प्रो. रीता बहुगुणा जोशी के प्रयासों से हुआ था। आज 5 साल बाद, यह क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र बन चुका है। इस खास मौके पर समिति ने भव्य आयोजन कर इस सफर को यादगार बना दिया। जहां विश्वास होता है… वहीं इतिहास बनता है।

भजन संध्या: सुरों में डूबी भीड़

इस कार्यक्रम का दिल था — भजन संध्या। सुप्रसिद्ध भजन गायकों ने जब मंच संभाला, तो हर शख्स जैसे संगीत में खो गया। “जय परशुराम” के जयघोष और मधुर भजनों ने ऐसा समां बांधा कि लोग देर रात तक वहीं जमे रहे। ये सिर्फ गाना नहीं था…ये सामूहिक आस्था की धड़कन थी।

जब हजारों लोग एक साथ गाते हैं… तो वो संगीत नहीं, शक्ति बन जाता है।

विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति की उपाध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में भगवान परशुराम जी के आदर्शों — धर्म, साहस और न्याय — को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इसके अलावा लखनऊ की मेयर सुषमा खड़कवाल, अलका दास, निर्मला पंत, रेणुका टंडन, मयंक जोशी, ऋचा जोशी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हजारों श्रद्धालु: आस्था का जनसैलाब

इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत थी — लोगों की भागीदारी। हजारों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, आरती में शामिल हुए और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस की गई।

हर आयोजन का अंत होता है…लेकिन कुछ संदेश छोड़ जाता है। प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन लोगों के मन में भक्ति और एकता की भावना गहराई तक बस गई। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं…सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गया।

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