हापुड़ में “जलती चिता से हुक्का… इंसानियत या तमाशा?”
श्मशान… जहां खामोशी बोलती है। लेकिन यहां… इंसानियत जल रही थी। एक तरफ 75 साल की बुजुर्ग की अंतिम विदाई…दूसरी तरफ कुछ युवकों का बेहूदा खेल। और सवाल सीधा है हम बदल रहे हैं… या गिर रहे हैं? घटना: मौत के बीच ‘मजाक’ Hapur के एक श्मशान घाट में जो...