नई दिल्ली: बदलते मौसम और वायरल संक्रमण के बीच बुखार के बाद खांसी, गले में खराश और संक्रमण की समस्या लोगों को परेशान कर रही है। गले में कुछ चिपचिपा या अटका हुआ महसूस होना, चुभन, खाना निगलने में परेशानी, सूजन और लगातार खांसी जैसे लक्षण गले के संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं। कई मामलों में खाना ऊपर की ओर आने की शिकायत भी हो सकती है। आयुर्वेद में गले की परेशानी और खांसी से राहत के लिए कई उपाय बताए गए हैं।
वायरल संक्रमण, स्वाइन फ्लू और मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों सर्दी-जुकाम के साथ गले में दर्द और संक्रमण की शिकायत भी सामने आ रही है। गले की समस्या होने पर केवल गले की जांच ही पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि नाक से जुड़ी परेशानियों पर भी ध्यान देना जरूरी बताया गया है।
गले के संक्रमण में दिख सकते हैं ये लक्षण
गले में संक्रमण होने पर खराश और जलन, गले के पिछले हिस्से में बलगम का जमा होना, टॉन्सिल में सूजन और दर्द, आवाज का बैठना या भारी होना, बुखार और खांसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा गले में लगातार सूखापन, जबड़े और गर्दन में दर्द तथा सिरदर्द की शिकायत भी हो सकती है।
आयुर्वेद में बताई गई हैं कई जड़ी-बूटियां
चरक संहिता के सूत्र स्थान के चौथे अध्याय में गले की जलन, दर्द और संक्रमण से जुड़ी परेशानी के लिए कई औषधीय जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। इनमें सारिवा, ईख की जड़, मुलेठी, मुनक्का, विदारीकंद, कैटर्य, हंसपदी, तुलसी और गोक्षुर सहित 10 औषधियों का जिक्र किया गया है।
गले में दर्द या संक्रमण की स्थिति में मुलेठी और तुलसी का काढ़ा लेने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार इनका सेवन गले को राहत देने में मदद कर सकता है।
वात, पित्त और कफ के असंतुलन को भी बताया गया कारण
सुश्रुत संहिता के निदान स्थान के 16वें अध्याय में गले की बीमारियों के कारणों का उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात, पित्त और कफ दोष के असंतुलित होकर गले में जमा होने से संक्रमण, टॉन्सिल में सूजन और गले से जुड़ी अन्य परेशानियां हो सकती हैं।
गरारे करना बताया गया सरल उपाय
अष्टांग हृदय और सुश्रुत संहिता में गले से जुड़ी परेशानियों में गरारे यानी कुल्ला करने को उपयोगी उपाय बताया गया है। कफ को कम करने वाले पदार्थों जैसे हल्दी, सेंधा नमक या त्रिफला को गर्म पानी में मिलाकर गरारे करने की सलाह दी जाती है। इससे गले की सफाई और खराश में राहत मिल सकती है।
हल्दी और सेंधा नमक से करें गरारे
एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर दिन में 2 से 3 बार गरारे करने की सलाह दी जाती है।
मुलेठी और शहद से गले को मिल सकती है राहत
आधा चम्मच मुलेठी पाउडर को शहद में मिलाकर धीरे-धीरे चाटने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेदिक चिकित्सक के मुताबिक, इससे गले की सूजन और खराश में राहत मिल सकती है।
तुलसी, अदरक और काली मिर्च का काढ़ा
काढ़ा बनाने के लिए पानी में 5 से 6 तुलसी के पत्ते, थोड़ा कद्दूकस किया हुआ अदरक और 2 काली मिर्च डालकर उबालें। इसे गुनगुना होने पर पीने की सलाह दी जाती है।
तेज दर्द, बुखार या सूखी खांसी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें
डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक, अगर निगलते समय तेज दर्द, बुखार या सूखी खांसी जैसे खास लक्षण महसूस हो रहे हैं तो आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सक उचित जांच के बाद समस्या का सही कारण पता लगाकर उपचार की सलाह दे सकते हैं।
