गैंगस्टर एक्ट पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, अपराध की कमाई साबित किए बिना नहीं होगी संपत्ति कुर्क

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी संपत्ति को जब्त करने से पहले राज्य सरकार के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि वह संपत्ति अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई है। अदालत ने कहा कि केवल आपराधिक मुकदमे दर्ज होना संपत्ति कुर्क करने का आधार नहीं बन सकता। न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने देवरिया निवासी कमलेश्वर प्रताप उर्फ अप्पू की अपील स्वीकार करते हुए उनके मकान और…

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चाय-बिस्कुट ले जाने पर गई नौकरी, हाई कोर्ट ने कहा- 17 साल की सेवा पर इतनी बड़ी सजा नहीं; चपरासी की बहाली के आदेश

रांची: चाय और बिस्कुट घर ले जाने के आरोप में नौकरी से निकाले गए एक चपरासी को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि 17 साल की सेवा देने वाले कर्मचारी को इस तरह के आरोप पर नौकरी से निकालना अत्यधिक कठोर कार्रवाई है और यह न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। मामला बोकारो जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) में संविदा पर…

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‘प्रधानों को प्रशासक बनाकर नहीं रखा जा सकता…’ इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार से मांगा जवाब

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह की नियुक्तियां डिवीजन बेंच के पूर्व आदेशों के उल्लंघन और न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकती हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है। मामले…

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शादी का वादा टूटना ही रेप नहीं! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी के खिलाफ चार्जशीट से लेकर पूरी कार्यवाही रद्द

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी का वादा पूरा न होना अपने आप में दुष्कर्म का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह साबित होना आवश्यक है कि शुरुआत से ही शादी का वादा धोखा देने की नीयत से किया गया था और उसी आधार पर सहमति हासिल की गई थी। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज चार्जशीट, समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह…

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