लखनऊ की एक गली… जहां रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी, वहां एक ऐसा सच दफन था जिसे सुनकर रिश्तों पर से भरोसा उठ जाए। ये कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं—ये कहानी है उस अंधे इश्क की, जो धीरे-धीरे इंसान को इंसान नहीं रहने देता।और जब सच सामने आया… तो हर कोई बस यही पूछ रहा था—“क्या कोई रिश्ता इतना गिर सकता है?” प्यार से शुरू हुई कहानी, कत्ल पर खत्म चार साल पहले शुरू हुआ एक “सीक्रेट रिलेशन”… धीरे-धीरे जुनून बना…फिर जिद…और आखिर में—जुर्म 36 साल की रंजना और…
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1228 जॉब, 100% प्लेसमेंट!” योगी का हेल्थ कार्ड—नर्सिंग में दांव- चुनावी चाल?
तालियों की गूंज…स्टेज पर मुस्कुराते चेहरे…और हाथों में चमकते नियुक्ति पत्र…लेकिन सवाल वही पुराना क्या ये सिर्फ नौकरी है, या एक पॉलिटिकल मैसेज? लखनऊ में हुए इस मेगा इवेंट में योगी आदित्यनाथ ने 1228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र देकर हेल्थ सेक्टर की नई कहानी लिखने का दावा किया। 1228 नियुक्तियां: रोजगार या ‘पावर शो’? सरकार कह रही है “ये सेवा का मिशन है।” 1228 युवाओं को जॉब मिली— लेकिन इसके पीछे का मैसेज और बड़ा है। सरकार दिखाना चाहती है—हम रोजगार दे रहे हैं। और सिस्टम कहना चाहता है—हम बदल…
Read MoreEMI ने छीन ली सांसें: मां-बेटे की मौत ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया
लखनऊ के बंथरा के नींवा गांव की सुबह किसी आम दिन जैसी नहीं थी। यहां चाय की केतली नहीं उबली, बल्कि एक घर के भीतर मौत ने खामोशी से दस्तक दी। मां और बेटे की लाशें, मुंह से निकलता झाग, और बिखरी हुई उम्मीदें… ये सिर्फ एक खबर नहीं, सिस्टम की असफलता का पोस्टमार्टम है। एक छोटा सा परिवार, एक छोटा सा ढाबा, और बड़ा सा कर्ज। सवाल सीधा है क्या बैंक की EMI अब मौत का वारंट बन चुकी है? बंथरा का वो कमरा जहां जिंदगी हार गई 52…
Read Moreनौकरी, स्कूटी, शादी के पैसे—योगी का ‘बेटी पावर पैक’!
लखनऊ के मंच से जब आंकड़े गूंजते हैं, तो वो सिर्फ नंबर नहीं होते—वो उम्मीदों की आवाज़ होते हैं… और कभी-कभी राजनीतिक ब्रांडिंग का बैकग्राउंड म्यूजिक भी। सरकार कहती है—बेटियां आगे बढ़ रही हैं। जमीन पूछती है—कितनी तेज़? नौकरी का बड़ा दावा: ‘हर घर रोजगार’ या ‘हर भाषण में रोजगार’? Yogi Adityanath ने बताया कि प्रदेश में 9 लाख से ज्यादा सरकारी भर्तियां हो चुकी हैं, जिसमें 1.75 लाख से अधिक बेटियों को नौकरी मिली। सुनने में ये आंकड़ा किसी चुनावी सुपरहिट गाने जैसा लगता है जो हर रैली में…
Read More“तेहरान में बम, प्रयागराज में बोतल महंगी! जंग की आग अब आपकी जेब तक”
तेहरान में मिसाइल गिरी या नहीं इस पर बहस चल रही है। लेकिन प्रयागराज में पानी की बोतल जरूर महंगी हो गई है। यानी जंग अब टीवी स्क्रीन से निकलकर सीधे किचन, दुकान और जेब तक पहुंच चुकी है। और सबसे बड़ी विडंबना जिसे प्यास बुझानी थी, वही अब महंगाई की आग बढ़ा रहा है। प्लास्टिक का प्राइस बम: उद्योग की कमर टूटी प्रयागराज के छोटे-छोटे वाटर प्लांट इन दिनों ‘सर्वाइवल मोड’ में हैं। पीवीसी के दाम 40 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं, जबकि पीईटी जिससे पानी की बोतल…
Read More“हैंडपंप से पाइपलाइन तक: योगी के 9 साल में बदला UP या बदली कहानी?”
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पानी अब सिर्फ जीवन नहीं, ‘नैरेटिव’ भी बन चुका है। एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि गांव-गांव तक शुद्ध पानी पहुंचा, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं क्या पाइपलाइन से पानी आया या सिर्फ वादों की धार बह रही है? 9 साल का रिपोर्ट कार्ड: वादों का वजन या हकीकत का असर? मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने 9 साल पूरे होने पर अपनी सरकार की उपलब्धियों का खाका पेश किया। उन्होंने साफ कहा—सरकार Narendra Modi के विजन को जमीन पर उतारने के मिशन पर…
Read Moreगोरखपुर में गैस सिलेंडर के लिए लगी लाइन बनी अखाड़ा, जमकर मारपीट
गोरखपुर की एक साधारण सुबह अचानक लोकल ड्रामा शो में बदल गई। गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी कतार में खड़े लोग पहले धूप से परेशान थे, फिर इंतजार से और आखिर में दो लोगों की बहस से. पीपीगंज थाना क्षेत्र में स्थित आशीष ईडेन गैस सर्विस के बाहर लाइन धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी. लेकिन तभी दो लोगों के बीच हुई छोटी सी कहासुनी देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। कुछ सेकंड में ही माहौल ऐसा हो गया मानो सिलेंडर की जगह बॉक्सिंग मैच का टिकट बंट…
Read Moreअंतिम संस्कार की तैयारी… एंबुलेंस गड्ढे से टकराई और ‘मृत’ ने ले ली सांस!
भारत में सड़क के गड्ढों को लेकर अक्सर गुस्सा निकलता है. लेकिन पीलीभीत की इस कहानी में वही गड्ढा अचानक जिंदगी का स्विच बन गया. एक महिला जिसे डॉक्टरों ने लगभग “ब्रेन डेड” मान लिया था. परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था. और तभी एंबुलेंस एक गहरे गड्ढे से टकराई. एक जोरदार झटका…और अचानक वह महिला फिर से सांस लेने लगी. यह कहानी सुनने में फिल्मी लग सकती है, लेकिन पीलीभीत के एक परिवार के लिए यह मौत और जिंदगी के बीच का वास्तविक मोड़ बन गई. जब जिंदगी से…
Read Moreदो सरकारी नौकरी! एक ही मार्कशीट से चलता रहा ‘डबल सैलरी का खेल
सरकारी नौकरी को भारत में लोग जीवन की अंतिम मंज़िल मानते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी “सरकारी कलाकार” निकला जिसने नौकरी को मंज़िल नहीं बल्कि डबल इनकम स्कीम बना लिया. एक ही मार्कशीट, एक ही पहचान और दो-दो सरकारी विभाग.करीब 17 साल तक सरकारी खजाने से दो जगह से वेतन उठाने का खेल चलता रहा और सिस्टम सोता रहा. अब जब परतें खुलीं तो कहानी किसी फिल्मी स्कैम से कम नहीं निकली. जब नौकरी बनी ‘डबल इनकम स्कीम’ उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिलों से सामने…
Read More“योगी का वार: जमीन के फर्जी खेल पर ब्रेक, कर्मचारियों की संपत्ति पर नजर”
लखनऊ के लोक भवन में मंगलवार की कैबिनेट बैठक महज एक सरकारी औपचारिकता नहीं थी. यह उस प्रशासनिक स्क्रिप्ट का नया अध्याय था, जहां सरकार ने जमीन माफिया, फर्जीवाड़े और सिस्टम की ढिलाई पर एक साथ कई ताले जड़ने की कोशिश की.मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे Yogi Adityanath के सामने जब प्रस्तावों की फाइलें खुलीं, तो फैसले सिर्फ कागज पर नहीं रहे. 31 प्रस्तावों की मंजूरी ने प्रशासनिक मशीनरी को एक स्पष्ट संदेश दिया कि अब नियमों का खेल थोड़ा ज्यादा सख्त होने वाला है. रजिस्ट्री से पहले खतौनी जांच:…
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