20 रुपये की रिश्वत का केस 30 साल चला, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के क्लर्क-चपरासी को किया बरी; जानें कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला

नई दिल्ली: 20 रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा मुकदमा करीब तीन दशक तक चलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में खत्म हुआ। अदालत ने गुजरात सरकार के एक क्लर्क और एक चपरासी की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल 20 रुपये बरामद हो जाने के आधार पर रिश्वत लेने की सजा कायम नहीं रखी जा सकती, जब तक रिश्वत की मांग साबित न हो। फरवरी 1996 का है पूरा मामला यह मामला फरवरी 1996 का है। एक छात्र शैक्षिक फीस में छूट…

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22 साल जेल में रहने के बाद बेगुनाह साबित हुआ शख्स, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी- बिना पुख्ता सबूत आजादी छीनना न्याय व्यवस्था की विफलता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ओडिशा के नबरंगपुर जिले के रहने वाले अर्जुन जानी को 22 वर्ष बाद हत्या के मामले से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि पर्याप्त और विश्वसनीय सबूतों के बिना किसी व्यक्ति को दो दशक से अधिक समय तक जेल में रखना आपराधिक न्याय प्रणाली की गंभीर और सामूहिक विफलता को दर्शाता है। शीर्ष अदालत ने जांच प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणी की। 2004 के ट्रिपल मर्डर केस से जुड़ा है मामला यह मामला वर्ष…

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45 साल बाद मिला इंसाफ, लेकिन बहुत देर से… सुप्रीम कोर्ट ने जिन 3 को बताया बेगुनाह, उनमें एक पूरी उम्रकैद काट चुका था

नई दिल्ली: न्याय मिलने में हुई देरी का एक बेहद मार्मिक उदाहरण उत्तर प्रदेश के 1977 के चर्चित हत्या मामले में सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 45 साल बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि इनमें से एक आरोपी अपनी पूरी उम्रकैद की सजा पहले ही जेल में काट चुका था और बाद में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सजा माफ किए जाने के बाद ही उसकी रिहाई हो सकी। 1977 में हुए इस…

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धर्म बदलते ही खत्म SC स्टेटस? कोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस

दिल्ली के कोर्टरूम में आज सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पहचान की पूरी बहस सुनाई दी। सवाल सीधा था क्या धर्म बदलते ही सामाजिक न्याय का हक भी बदल जाता है? और सुप्रीम कोर्ट का जवाब उतना ही सीधा… और उतना ही भारी पड़ा। फैसला क्या कहता है? Supreme Court of India ने साफ किया कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला व्यक्ति SC स्टेटस का दावा नहीं कर सकता। मुस्लिम या ईसाई धर्म अपनाने पर अनुसूचित जाति की पहचान खत्म मानी जाएगी। ऐसे…

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“निठारी केस का अंत! 19 साल बाद जेल से बाहर आएगा सुरेंद्र कोली”

साल 2006 के निठारी सीरियल किलिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोषी सुरेंद्र कोली को रिंपा हल्दर मर्डर केस में उम्रकैद की सजा से बरी कर दिया है।बेंच ने आदेश दिया कि — “अगर कोली किसी और केस में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत रिहा किया जाए।” यह फैसला 7 अक्टूबर को सुरक्षित रखा गया था, जिसे  3 जजों CJI बीआरगवई, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने आज सुनाया।  कोली पहले ही 12 मामलों में हो चुका…

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“50 साल भी रह लो… घर मालिक का ही रहेगा!” — सुप्रीम फटकार

देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में ज्योति शर्मा बनाम विष्णु गोयल (कर्नाटक) केस में ऐसा फैसला सुनाया है, जो देशभर के किरायेदारों और मकानमालिकों के लिए नज़ीर बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा — “किरायेदार मालिक की अनुमति से रहता है, इसलिए Adverse Possession (प्रतिकूल कब्जे) का सिद्धांत लागू नहीं होता।” यानि, अगर आप किसी मकान में सालों से किराए पर रह रहे हैं, तब भी उस संपत्ति के मालिक नहीं बन सकते! क्या था मामला? कर्नाटक में किरायेदार ज्योति शर्मा ने दावा किया कि वह…

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