रेट्रो रिव्यू: ‘सुजाता’ (1959)- एक फिल्म, जो आज भी आईना दिखाती है

कुछ फिल्में सिर्फ देखी नहीं जातीं… वो आपको भीतर तक असहज कर देती हैं। 1959 में आई Sujata ऐसी ही एक फिल्म है—धीमी, सधी हुई, लेकिन भीतर से विस्फोटक। Bimal Roy का निर्देशन, Nutan की आत्मा छू लेने वाली एक्टिंग और Sunil Dutt की सादगी—ये फिल्म किसी लाउड ड्रामा से नहीं, बल्कि खामोशी से वार करती है। कहानी नहीं, समाज का एक्स-रे सुजाता कोई लव स्टोरी नहीं, ये एक सिस्टम की पोल खोलती रिपोर्ट है। एक ब्राह्मण परिवार… एक अनाथ बच्ची… और एक ऐसा सच, जिसे छुपाकर रखा गया—कि वो “अछूत” है। सवाल…

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धर्म बदलते ही खत्म SC स्टेटस? कोर्ट के फैसले ने छेड़ी नई बहस

दिल्ली के कोर्टरूम में आज सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि पहचान की पूरी बहस सुनाई दी। सवाल सीधा था क्या धर्म बदलते ही सामाजिक न्याय का हक भी बदल जाता है? और सुप्रीम कोर्ट का जवाब उतना ही सीधा… और उतना ही भारी पड़ा। फैसला क्या कहता है? Supreme Court of India ने साफ किया कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला व्यक्ति SC स्टेटस का दावा नहीं कर सकता। मुस्लिम या ईसाई धर्म अपनाने पर अनुसूचित जाति की पहचान खत्म मानी जाएगी। ऐसे…

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‘नीची जाति कहने वालों के नाम’ Review: 6 पीढ़ियाँ… और वही पुराना जख्म

Neechi Jaati Kahne Walon Ke Naam सिर्फ एक उपन्यास नहीं, सामाजिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट है। लेखक Ashish Sharma ने 1940 से 2044 तक की 104 साल लंबी पारिवारिक यात्रा को ऐसे पन्नों में उतारा है, जो पढ़ते समय हथेली में चुभते रहते हैं। एक ठाकुर और एक दलित की दोस्ती से शुरू हुई कहानी, वादे से भरी थी। सपना था कि आने वाली पीढ़ियाँ जाति से ऊपर उठेंगी। सवाल यह है क्या सपना इतिहास के वजन से दब गया? छह पीढ़ियाँ, एक ही घाव रघुवीर और रामदीन ने 1940 में जो…

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