“हैंडपंप से पाइपलाइन तक: योगी के 9 साल में बदला UP या बदली कहानी?”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पानी अब सिर्फ जीवन नहीं, ‘नैरेटिव’ भी बन चुका है। एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि गांव-गांव तक शुद्ध पानी पहुंचा, दूसरी तरफ सवाल उठ रहे हैं क्या पाइपलाइन से पानी आया या सिर्फ वादों की धार बह रही है? 9 साल का रिपोर्ट कार्ड: वादों का वजन या हकीकत का असर? मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने 9 साल पूरे होने पर अपनी सरकार की उपलब्धियों का खाका पेश किया। उन्होंने साफ कहा—सरकार Narendra Modi के विजन को जमीन पर उतारने के मिशन पर…

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KC Tyagi ने छोड़ी JDU, NDA की दीवार में दरार या नई चाल?”

दिल्ली की राजनीति में कभी-कभी आवाज नहीं आती… बस कंपन महसूस होता है। आज वही कंपन महसूस हुआ, जब एक चिट्ठी ने गठबंधन की नींद उड़ा दी। कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं, कोई भाषण नहीं… बस एक सिग्नेचर और सियासत का पारा चढ़ गया। “एक सिग्नेचर, कई सवाल”: KC त्यागी का इस्तीफा K. C. Tyagi ने जेडीयू से किनारा कर लिया है। वो चेहरा, जो सालों से पार्टी का वैचारिक ‘स्पोक्समैन’ माना जाता था, अचानक फ्रेम से बाहर चला गया। उनका इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि उस narrative का…

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Villains या Viewpoints? Epstein Files में Global Power Names गायब

दुनिया जिन चेहरों को अक्सर “global villains” के तौर पर देखती है, Iran के Supreme Leader, Russia के President Vladimir Putin, North Korea के Kim Jong Un, और China के President Xi Jinping उनमें से किसी का भी नाम Epstein Files में नहीं दिखता। यह बात कई लोगों को चौंकाती है, क्योंकि Epstein Files को लेकर दुनिया भर में high-profile connections की चर्चा रही है। Epstein Files में नाम कैसे आते हैं? Epstein Files उन दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड्स का संकलन हैं, जिनमें संपर्क, यात्राओं, सामाजिक नेटवर्क और कानूनी दस्तावेज़ों का ज़िक्र किया…

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“थरूर साहब— BJP से दूरी या बस शब्दों की Gymnastics?”

भारत की राजनीति जितनी जटिल है, उतनी ही दिलचस्प भी। और उसमें अगर नाम शशि थरूर का हो तो मसाला अपने आप बढ़ जाता है। हाल के दिनों में थरूर के कुछ बयान, कुछ तस्वीरें और कुछ “पॉलिटिकल बॉडी लैंग्वेज” ने यह सवाल गर्म कर दिया— क्या थरूर कांग्रेस से दूर जा रहे हैं? या बीजेपी धीरे-धीरे उनके करीब? थरूर: कांग्रेस में, मगर अपनी लय में थरूर की खासियत यह है कि वो कांग्रेस में रहते हुए भी अक्सर “कांग्रेस की आधिकारिक लाइन” से थोड़ा अलग सुर निकाल देते हैं।…

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बिहार में लहर, यूपी में पहाड़—एगो फार्मूला से ना खुली यूपी की ताला

बिहार में चुनाव परिणाम आइल त राजनीति ऐसे हिलल जइसे कड़ाहा में चऊमिन। अब सब पूछs: “यूपी में ई चमत्कारी ‘बिहार मॉडल’ लागू हो सकेला?” बाबू, बात सीधी-बिहारी में समझs— “बिहार एगो तालाब, यूपी पूरा समुंदर!” तालाब वाला तरीका समुंदर में चलेल? ई सोचलही सटायर बा। बिहार बनाम यूपी: लगs त पड़ोसी, बाकिर राजनीति में पूरा चचेरा-गोटाला! बिहार: जाति-ब्लॉक वाला सरल पहेली बिहार के राजनीति पाँच गो ठोस ब्लॉक पर घूमेला— यादव, कुशवाहा, दलित, मुस्लिम, कुर्मी। एक ब्लॉक हिलल = पूरा चुनाव का बैलेंस डोल गइल। मतलब बिहार में चुनाव…

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“UP Cabinet में बड़ा बवाल: कौन हटेगा, कौन बनेगा मंत्री? चर्चा गरम!”

बिहार चुनावों के नतीजे आते ही, भाजपा हाईकमान का फोकस अब पूरी तरह उत्तर प्रदेश पर शिफ्ट हो चुका है।2027 विधानसभा चुनावों से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार में संगठनात्मक पुनर्गठन और मंत्रिमंडल विस्तार, दोनों पर एक्सप्रेस स्पीड में काम शुरू है। UP कैबिनेट में अभी 54 मंत्री हैं, जबकि सीमा 60 है—मतलब 6 कुर्सियाँ खाली। और राजनीति में खाली कुर्सियाँ?सीधा संकेत: कोई आने वाला है और कोई जाने वाला है। कौन हट सकता है?—अफवाहों की धूल में संभावनाएँ चमकती हुई सूत्रों के मुताबिक संघ की ताज़ा रिपोर्ट्स में किसी का…

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बिहार में नीतीश की 10वीं इनिंग: NDA की जीत के बाद सबसे बड़ी चुनौतियाँ

NDA की बम्पर जीत और रिकॉर्ड 10वीं बार शपथ… नीतीश कुमार ने साबित कर दिया कि वह बिहार राजनीति के evergreen player हैं। लेकिन अब असली चुनौती सत्ता नहीं— वायदों का पहाड़ है। मतलब— जीत तो ले ली, अब डिलीवरी करनी है! नीतीश कुमार की सबसे बड़ी चुनौती: “वादे vs बिहार का बजट” बिहार का आर्थिक बजट पहले ही पतला है, और वादे… मानो election manifesto नहीं, wish-list थी। एनडीए के वादे जिन पर अब नीतीश की परीक्षा होगी- डेढ़ करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को…

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ज़्यादा वोट शेयर के बावजूद RJD क्यों हारी? यह है पूरा गणित

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे चौंकाने वाली तस्वीर RJD के प्रदर्शन की रही। महागठबंधन का नेतृत्व करने वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 25 सीटें जीत पाई। चौंकाने वाली बात ये रही कि इतनी खराब सीट परफॉर्मेंस के बावजूद RJD को किसी भी पार्टी से ज़्यादा—23% वोट शेयर मिला। लेकिन फिर सवाल उठता है… जब वोट सबसे ज़्यादा मिले तो सीटें सबसे कम क्यों? 23% वोट शेयर—फिर भी गिरावट! RJD को इस बार 23% वोट मिला, जो पिछले चुनाव के 23.11% से थोड़ा…

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बिहार में घमंड की एंट्री नहीं-नंद वंश भी नहीं बच पाया

भारत की राजनीति में बिहार का इतिहास हमेशा एक बात साफ बताता है—यहां पावर की इज्जत होती है, लेकिन अहंकार की नहीं। फिर चाहे कोई कितना ही बड़ा राजा, नेता या सत्ता-सम्राट क्यों न हो जाए, जब ‘घमंड मोड ऑन’ होता है, तो बिहार उसे ‘ऑफ’ करना अच्छी तरह जानता है। नंद वंश की कहानी: जब बिहार ने साम्राज्य को रीसेट कर दिया नंद वंश उस दौर की सबसे शक्तिशाली राजशक्ति मानी जाती थी। Their empire was huge, wealth was massive, and influence unmatched. लेकिन इतिहास गवाह है कि उनके…

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नीतीश कुमार की क्लीन इमेज क्यों बनी ‘बिहार विजय सूत्र’?

बिहार चुनाव 2025 ने एक बार फिर भारतीय राजनीति का सबसे पुराना फॉर्मूला ताजा कर दिया—साफ छवि = साफ जीत। नीतीश कुमार की वापसी कोई रातोंरात नहीं हुई। यह क्लीन ब्रांड, भरोसे वाला चेहरा और स्थिर राजनीति का पैकेज है, जो बिहार के मतदाताओं के दिल में आज भी वैल्यू रखता है। नीतीश–मोदी की जोड़ी: एक भरोसेमंद ‘स्टेबल पैकेज’ बिहार ने इस बार जिस बात पर सबसे ज्यादा भरोसा किया, वह था— अनिश्चितता से दूर रहना। मोदी का नेशनल ब्रांड + नीतीश की स्टेबल गवर्नेंस = मतदाताओं की पसंदीदा कॉम्बो-डील। महागठबंधन के…

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