
खेत हरे हैं… लेकिन खतरा अदृश्य है। गन्ने की फसल पर ऐसा हमला शुरू हो चुका है, जो दिखता कम है और नुकसान ज्यादा करता है। और अगर अभी नहीं संभले… तो पूरी मेहनत मिट्टी में मिल सकती है। ये सिर्फ कीट नहीं…किसान की कमाई पर सीधा वार है।
“सीएम का आदेश, खेत बचाओ”—अलर्ट जारी
सीएम Yogi Adityanath के निर्देश के बाद गन्ना विभाग ने साफ चेतावनी दी है अप्रैल से जून तक अंकुर बेधक (Early Shoot Borer) और चोटी बेधक (Top Borer) का हाई रिस्क है। ये वो समय है जब लापरवाही, सीधे नुकसान में बदलती है।
कैसे पहचानें हमला?
ये कीट सीधे पौधे के “दिल” पर वार करते हैं। लक्षण- बीच की पत्तियां सूखना। गोंफ (shoot) आसानी से निकल जाना। पौधे का विकास रुक जाना। जब पौधे का दिल सूख जाए… तो समझिए हमला अंदर तक पहुंच चुका है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
गन्ना विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है— यह कीट पौधे के अंदर घुसकर नीचे तक नुकसान करता है। यानी ऊपर से खेत हरा दिखेगा…लेकिन अंदर से फसल खोखली हो सकती है। हर हरा खेत, सुरक्षित नहीं होता।
बचाव के 5 मास्टर स्ट्रोक
अंडे और सूंड़ी खत्म करें
प्रभावित पत्तियों पर दिखे अंडों को तुरंत तोड़कर नष्ट करें।
जैविक हथियार अपनाएं
ट्राइकोकार्ड का इस्तेमाल हर 15 दिन में करें।
दवा का सही इस्तेमाल
फिप्रोनिल + इमिडाक्लोप्रिड या
क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल + थायोमेथॉक्सम का छिड़काव करें।
ट्रैप लगाएं
फेरोमोन या लाइट ट्रैप 25-30 मीटर दूरी पर लगाएं।
जड़ से इलाज
क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल सॉल्यूशन से जड़ों के पास ड्रेंचिंग करें।
कीट से लड़ाई में देरी, फसल की हार तय करती है।
क्यों बढ़ रहा खतरा?
गर्मी बढ़ते ही कीटों की एक्टिविटी बढ़ जाती है। और अप्रैल-जून उनका “पीक सीजन” होता है। अगर इस समय नियंत्रण नहीं किया तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। मौसम बदला है… तो रणनीति भी बदलनी होगी।
किसान के लिए बड़ा सवाल
महंगाई, लागत और मौसम के बीच किसान पहले ही दबाव में है। अब ये कीट…उसकी मेहनत पर एक और हमला। खेती अब सिर्फ मेहनत नहीं… रणनीति का खेल बन चुकी है। सरकार अलर्ट दे सकती है…वैज्ञानिक सलाह दे सकते हैं…लेकिन खेत बचाने की आखिरी जिम्मेदारी किसान की ही है। इस बार जो जागा, वही कमाएगा… जो सोया, उसकी फसल खो जाएगी।
लखनऊ में गर्मी का ‘अलार्म’ बजा! बच्चों के स्कूल टाइम पर बड़ा फैसला
