प्रदर्शन बना हादसा! आग में जला विरोध, बीजेपी विधायक भी झुलसीं

अजमल शाह
अजमल शाह

आग विरोध की थी… लेकिन लपटें अपने ही लोगों को छू गईं। बहराइच में राजनीति का प्रदर्शन अचानक हादसे में बदल गया। और सवाल उठता है—क्या विरोध अब सिर्फ नारे नहीं, जोखिम भी बन चुका है? ये कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं था… ये “जन आक्रोश” था, जो अचानक “जन हादसा” बन गया।

पुतला दहन बना हादसा

Bahraich में भाजपा कार्यकर्ताओं ने Rahul Gandhi और Akhilesh Yadav का पुतला फूंका। नारेबाजी तेज थी, माहौल गरम था… और तभी आग ने अपना रुख बदल लिया। पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक Anupama Jaiswal
इस आग की चपेट में आ गईं। हाथ झुलस गए… बाल जल गए…और तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा। राजनीति की आग जब बेकाबू हो, तो वो पहचान नहीं देखती।

मुद्दा क्या था?

यह प्रदर्शन “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के संशोधनों को लेकर था। भाजपा का आरोप विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को रोका। वहीं विपक्ष का तर्क— ये मुद्दा राजनीतिक खेल का हिस्सा है। लेकिन सच्चाई ये है मुद्दा चाहे जो हो, सड़क पर उतरते ही वो भावना बन जाता है। राजनीति में मुद्दे जल्दी बदलते हैं… लेकिन आग का असर तुरंत दिखता है।

जन आक्रोश या राजनीतिक स्क्रिप्ट?

“जन आक्रोश मार्च” निकाला गया… नारे लगे… पुतले जले…लेकिन सवाल ये है क्या ये सच में जनता का गुस्सा था, या एक planned political show? कलेक्ट्रेट के पास जो हुआ…वो सिर्फ विरोध नहीं, एक “visual message” था। आज की राजनीति में हर प्रदर्शन एक कैमरा फ्रेम भी होता है।

सिस्टम और सुरक्षा पर सवाल

इतने बड़े प्रदर्शन में सुरक्षा इंतजाम कहां थे? क्या किसी ने सोचा कि आग बेकाबू हो सकती है? या फिर सब कुछ “नॉर्मल” मान लिया गया…
जब तक हादसा नहीं हुआ? हम अक्सर सुरक्षा को तब याद करते हैं, जब नुकसान हो चुका होता है।

जनता क्या देख रही है?

एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात… दूसरी तरफ उसी मुद्दे पर प्रदर्शन में महिला नेता घायल। ये विरोधाभास सिर्फ घटना नहीं…
एक बड़ा सवाल है। क्या राजनीति सच में मुद्दों के लिए है…या सिर्फ इमोशन भड़काने के लिए? जब नारे और हकीकत टकराते हैं, तो भरोसा टूटता है।

बहराइच का ये हादसा सिर्फ एक लोकल न्यूज़ नहीं… ये उस राजनीति का आईना है, जहां विरोध और जोखिम साथ चलते हैं। आज पुतला जला… कल शायद भरोसा जले। क्योंकि जब राजनीति आग से खेलती है… तो चिंगारियां हर किसी तक पहुंचती हैं।

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