कभी-कभी अदालतों में ऐसे फैसले आते हैं जो सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि समाज की सोच को आईना दिखा जाते हैं। ग्वालियर हाईकोर्ट में हुआ यह मामला भी कुछ ऐसा ही है—जहां एक पति अपनी पत्नी को वापस लाने की उम्मीद लेकर पहुंचा था, लेकिन कोर्ट से निकला फैसला रिश्तों की पारंपरिक परिभाषा को ही चुनौती दे गया। अदालत में बदला पूरा केस का रुख Madhya Pradesh High Court में दायर इस मामले की शुरुआत पति अवधेश की याचिका से हुई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी को अनुज…
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Period Leave पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: “कानून बना तो नौकरी कौन देगा?”
दिल्ली की सुबह में अदालत की कार्यवाही शुरू हुई तो किसी को अंदाजा नहीं था कि मासिक धर्म अवकाश (Period Leave) पर बहस अचानक इतना तीखा मोड़ ले लेगी। याचिका में मांग की गई थी कि महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेड पीरियड लीव अनिवार्य किया जाए। सुनने में यह मांग महिला अधिकारों के पक्ष में लगती है, लेकिन अदालत की नजर में तस्वीर इतनी सरल नहीं थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं को “कमजोर” बताने वाली नीतियां कभी-कभी उल्टा…
Read More‘खफद’ पर सुप्रीम कोर्ट का सीधा सवाल — धर्म या अधिकार
महिला जननांग विकृति (FGM) की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार गंभीरता से सुनवाई शुरू कर दी है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने हालिया जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें FGM को “अमानवीय, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक” बताया गया है। याचिका का सीधा आरोप है — यह प्रथा नाबालिग लड़कियों के मौलिक अधिकारों का सबसे बड़ा और सबसे चुप्पा उल्लंघन है। क्या है FGM या ‘खफद’? — “सात साल की बच्ची और सदियों पुरानी सोच” याचिका के अनुसार, खफद एक प्रक्रिया है जिसमें…
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