West Bengal SIR: बंगाल में 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की जरूरत, 37 लाख से ज्यादा अपील लंबित; सुप्रीम कोर्ट में ECI का हलफनामा

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने बताया कि SIR के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी 38 लाख से ज्यादा अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें से 37 लाख से अधिक मामले अभी लंबित हैं। आयोग ने इन अपीलों के तेजी से निपटारे के लिए राज्य में कुल 42 अपीलीय ट्रिब्यूनल की जरूरत बताई है। फिलहाल 19 ट्रिब्यूनल इन मामलों पर सुनवाई कर रहे हैं।…

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पश्चिम बंगाल में SIR पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, क्या न्यायपालिका नए चुनाव कराने का आदेश दे सकती है?

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि अगर कई विधानसभा क्षेत्रों में जीत के अंतर से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हों, तो क्या न्यायपालिका नए चुनाव कराने का आदेश दे सकती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इस पहलू पर याचिकाकर्ता से जवाब मांगा। टीएमसी ने 31 विधानसभा…

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Mamata सरकार की बहानेबाज़ी पर कोर्ट का ब्रेक, SIR को फास्ट-फॉरवर्ड!

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। पीठ की अगुवाई कर रहे Surya Kant ने साफ कहा कि हर दिन नए बहाने बनाकर प्रक्रिया को लटकाना स्वीकार्य नहीं है। अदालत का लहजा साफ था, संदेश और भी साफ। SIR पर क्यों मचा है सियासी संग्राम? मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतंत्र का बैकएंड सिस्टम है। यह वह इंजन है जो चुनावी गाड़ी को सही रास्ते पर रखता…

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अब छुपेगा नहीं खेल! SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का ‘Transparency वार’

पश्चिम बंगाल के SIR (Special Investigation Report) मामले में सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने पारदर्शिता को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दे दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है—अब रिकॉर्ड में गड़बड़ी छिपेगी नहीं। पंचायत और वार्ड ऑफिस में लगेगी ‘नामों की लिस्ट’ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, अब पंचायत और वार्ड कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर उन सभी व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक रूप से चिपकाए जाएंगे, जिनके रिकॉर्ड में किसी भी तरह की irregularity पाई गई है। कोर्ट का मानना है कि इससे प्रभावित लोगों…

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