राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI जांच की मांग ठुकराई, याचिका खारिज

लखनऊ: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले की CBI जांच कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद CBI जांच की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

मोहित अशोक की ओर से दायर इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विनोद शाही और मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह ने अदालत को बताया कि इसी विषय से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में समान मुद्दे पर हाईकोर्ट में सुनवाई का औचित्य नहीं बनता।

डिविजन बेंच ने सुनाया फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की डिविजन बेंच ने CBI जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक जनहित याचिका लंबित है। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 5 फरवरी 2020 को गठन के बाद प्राप्त सभी प्रकार के चंदे का विस्तृत ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

पारदर्शिता और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि धार्मिक परंपराओं या मंदिर के अनुष्ठानों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाए। याचिका में केवल ट्रस्ट के वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि जांच पूरी होने तक सभी वित्तीय रिकॉर्ड, जिनमें भौतिक दस्तावेज, डिजिटल लेजर, यूपीआई लेन-देन का विवरण और बैंक स्टेटमेंट शामिल हैं, सुरक्षित रखे जाएं ताकि किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

पहले भी दो याचिकाओं पर सुनवाई से किया था इनकार

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर में दान की गई धनराशि के कथित दुरुपयोग की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर चुका है। ये याचिकाएं अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और अधिवक्ता जसवंती ए. की ओर से दाखिल की गई थीं।

 

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