नई दिल्ली: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस वर्ष 11 जून 2026 को अधिकमास की पावन परमा एकादशी मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने तथा उन्हें प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
मान्यता है कि अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी का महत्व सामान्य एकादशी की तुलना में अधिक होता है। इस अवसर पर भगवान विष्णु को विशेष भोग अर्पित कर भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
पंचामृत का भोग माना जाता है विशेष
परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पंचामृत अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचामृत अर्पित करने से घर में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
पीले फलों का भोग करें अर्पित
भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय माना जाता है। ऐसे में परमा एकादशी के अवसर पर केले, आम और अन्य पीले फलों का भोग लगाना शुभ माना गया है। इसे सौभाग्य, समृद्धि और मंगल का प्रतीक बताया जाता है।
हलवा और मिठाइयों का भी है विशेष महत्व
पूजा के बाद भगवान विष्णु को सूजी का हलवा, मूंग दाल का हलवा, बेसन के लड्डू या केसरिया पेड़े का भोग लगाया जा सकता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए इन प्रसादों से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है पूजा
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी दल के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए जो भी प्रसाद या भोग अर्पित किया जाए, उसमें तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए।
तुलसी को भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय माना गया है और उनके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है।
परमा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी पर किए गए व्रत, जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने वाले भक्तों के जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख, शांति और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
भोग लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग शुद्ध और सात्विक होने चाहिए। हलवा या मिठाई शुद्ध देसी घी से तैयार की जानी चाहिए और यथासंभव प्रसाद घर पर ही बनाया जाना चाहिए।
पूजा और भोग अर्पण के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करना तथा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
