‘चोरों का सरदार’ बयान मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मानहानि केस की सुनवाई पर लगी रोक

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कथित मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-चीफ’ जैसी टिप्पणियों से जुड़े मामले में शीर्ष अदालत ने निचली अदालत में चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की है। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी अदालत में पेश हुए।

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि इस मामले में उठाए गए कानूनी सवाल पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन एक अन्य मामले से जुड़े हुए हैं। उन्होंने शशि थरूर से संबंधित एक अन्य प्रकरण का भी हवाला दिया।

दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में नोटिस जारी किया जाए। साथ ही, ट्रायल कोर्ट के समक्ष चल रही आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी। इस आदेश के बाद राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में चल रही प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकेगी।

सुनवाई के दौरान जज ने पूछा- अखबार में नाम छपेगा या नहीं?

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल किया, “अखबार में नाम छपेगा या नहीं छपेगा?” इस पर सिंघवी ने कहा कि उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की है, बल्कि सिर्फ अदालत के सामने अपना पक्ष रखा है।

इसके बाद जस्टिस नाथ ने पूछा कि क्या इस मामले में कोई उनका विरोध नहीं कर रहा है। जवाब में सिंघवी ने एक अन्य मामले का जिक्र किया, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत मिली थी और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने उसका विरोध किया था।

हालांकि, इस सुनवाई का मुख्य फैसला राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी करना और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाना रहा।

क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?

यह मामला सितंबर 2018 में राजस्थान में हुई एक सार्वजनिक रैली के दौरान राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। उस समय राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। भाजपा नेता महेश श्रीश्रीमल ने इस मामले में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और इसका असर भाजपा से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा पर भी पड़ा।

मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद 2021 में समन मिलने के बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी राहुल गांधी की याचिका?

8 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस एनआर बोरकर ने कहा था कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ऐसी कोई स्पष्ट अवैधता या गंभीर खामी नहीं दिखती, जिसके आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप किया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा था कि राहुल गांधी की टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री तक सीमित थी या इससे भाजपा के सदस्यों और पदाधिकारियों की मानहानि हुई, इसका फैसला साक्ष्यों और बयान के संदर्भ के आधार पर मुकदमे के दौरान किया जा सकता है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को मजिस्ट्रेट अदालत में पेश होने से छह सप्ताह की राहत दी थी, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

राहुल गांधी ने शिकायत की वैधता पर उठाए थे सवाल

राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल कथित टिप्पणी से सीधे प्रभावित व्यक्ति नहीं हैं। ऐसे में उनके द्वारा आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

राहुल गांधी के पक्ष ने कहा था कि टिप्पणी प्रधानमंत्री के संदर्भ में की गई थी, न कि भाजपा या किसी ऐसे स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले समूह के खिलाफ, जिसके सदस्य व्यक्तिगत तौर पर मानहानि का दावा कर सकें।

वहीं, शिकायतकर्ता और राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि मजिस्ट्रेट के सामने मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनाती है और इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करना उचित नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में चल रही इस मामले की कार्यवाही फिलहाल रुकी रहेगी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अभी राहुल गांधी के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम वैधता पर कोई फैसला नहीं सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया है और मामले का अंतिम फैसला आगे की सुनवाई के बाद होगा। फिलहाल इसे राहुल गांधी के लिए अंतरिम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

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