शहबाज़ का Middle East दौरा: डिप्लोमेसी या डैमेज कंट्रोल?

जब दुनिया जंग की तरफ बढ़ रही हो…तो कुछ नेता अचानक “शांति दौरे” पर निकल पड़ते हैं। और सवाल यही—क्या ये दौरा शांति के लिए है… या खुद को बचाने के लिए? इस्लामाबाद से उड़ान भरने वाला ये सफर सिर्फ चार दिन का है…लेकिन इसके असर सालों तक महसूस हो सकते हैं। दौरा शुरू: तीन देश, एक मकसद? Shehbaz Sharif अब Middle East की कूटनीतिक जमीन पर उतरने वाले हैं। Saudi Arabia Qatar Turkey तीन देश… तीन अलग एजेंडा… लेकिन एक common tension—Middle East instability। ये दौरा sightseeing नहीं… survival strategy…

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तुर्की का “ड्रोन बॉस”! किज़िलेल्मा ने F-16 को वर्चुअली पटका?

तुर्की ने अपनी मिलिट्री टेक्नोलॉजी में एक और तगड़ा दांव चला है। दावा किया गया है कि उसका बायरकतर किज़िलेल्मा कॉम्बैट ड्रोन एक हाई-एल्टीट्यूड सिम्युलेटेड एयर कॉम्बैट में अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान को लॉक करके वर्चुअल “सीधी हिट” दे आया।यह टेस्ट यूं कहें तो एक तरह का डिजिटल WWE था—लेकिन यहां SmackDown ड्रोन ने दिया। 1 घंटा 45 मिनट की उड़ान—और F-16 की “वर्चुअल विदाई” किज़िलेल्मा ने कोर्लू स्थित AKINCI टेस्ट सेंटर से उड़ान भरी और लगभग 1 घंटा 45 मिनट की फ्लाइट में यह मिशन पूरा किया।टेस्ट के दौरान…

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“तुर्की बोला – ‘हम आतंकी नहीं, डिप्लोमैट हैं!’ दिल्ली ब्लास्ट पर सफाई जारी”

दिल्ली ब्लास्ट केस में जब तुर्की कनेक्शन की बात भारतीय मीडिया में जोर पकड़ने लगी, तो अब सरकार ने खुद मैदान में उतरकर इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तुर्की के “डायरेक्टरेट ऑफ़ कम्युनिकेशन्स – सेंटर फॉर काउंटरिंग डिसइन्फ़ॉर्मेशन” की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया — “कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने यह दावा किया है कि तुर्की का भारत में हुई आतंकवादी घटनाओं से संबंध है और वह आतंकवादी समूहों को लॉजिस्टिक, कूटनीतिक और वित्तीय मदद देता है। ये सभी दावे…

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Pakistan-Afghanistan को न दोस्ती छोड़नी है, न धमकी कम करनी है!

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ कहा कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान से तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर किसी भी तरह का हमला या उकसावा हुआ तो जवाब “पूरी ताक़त से” दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा — “पाकिस्तान ने अब तक शांति वार्ता में बेहद सकारात्मक भूमिका निभाई है। हमारा मकसद टकराव नहीं, स्थिरता है।” उन्होंने कतर में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच हुई युद्धविराम वार्ता का जिक्र करते हुए बताया कि अगला चरण 6 नवंबर को तुर्की में…

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अमेरिका का अलर्ट – ग़ज़ा में फिर खौल रही है “हमास हांडी”!

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें “विश्वसनीय खुफिया रिपोर्टें” मिली हैं – जैसे किसी ने व्हाट्सएप फ़ॉरवर्ड कर दिया हो – कि हमास ग़ज़ा में फिर से ‘गड़बड़ करने की सोच रहा है’। यानी संघर्षविराम के बीच फिर से उबाल आ सकता है। हालांकि रिपोर्ट की तस्वीर, वीडियो या PDF अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है – पर अमेरिका ने इतना कह दिया कि “कुछ तो गड़बड़ है, दया नंदन।” अमेरिका की चेतावनी: “संघर्षविराम से मत खेलो, ये खिलौना नहीं है” विदेश मंत्रालय ने अपने बयानों में कहा…

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“दोहा डील: गोली नहीं, अब गले मिलने की तैयारी!”

दोहा की गर्म हवा में गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि डिप्लोमैटिक हैंडशेक्स की आवाज़ आई। पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधियों ने एक ऐसे समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं जो सुनने में तो शांति की घंटी जैसा लगता है – लेकिन क्या ये घंटी वाकई बजेगी या सिर्फ घुंघरू बजाकर चला जाएगा? विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने Twitter (या X) पर पोस्ट करके खुशी जताई – “क़तर और तुर्की शुक्रिया, हमने पहला कदम बढ़ा लिया है। अब देखिए ये Process किस स्टेशन पर जाकर रुकती है।” डार साहब ने साथ…

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‘Let There Be Peace!’ मुस्लिम देश बोले – ‘चलो अब कुछ अच्छा होने दो'”

जब दुनिया को लगा कि ट्रंप अब शांति वार्ताओं से रिटायर हो चुके हैं, तब उन्होंने नेतन्याहू के साथ मिलकर ग़ज़ा के लिए नया शांति प्रस्ताव पेश कर दिया। इस प्रस्ताव का मक़सद – “युद्ध नहीं, पुनर्निर्माण” और “टैंक नहीं, टेबल टॉक”। मुस्लिम देशों का ‘Unexpected Support’ क़तर, जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई, पाकिस्तान, तुर्की, इंडोनेशिया और मिस्र – यानी वो देश जो आमतौर पर अलग-अलग मत रखते हैं – इस बार एक सुर में बोले:“ट्रंप की कोशिश सराहनीय है।”कई तो इस बयान से इतना खुश हो गए कि लगा जैसे…

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