चमकदार केले के पीछे का सच! बिना लाइसेंस चल रहे थे 25 पकाने के केंद्र, 5 क्विंटल केले नष्ट; आखिर लोगों की सेहत से कैसे हो रहा खिलवाड़?

लखनऊ (ज़ीशान हैदर): बाजार से पीले और पके हुए केले खरीदते समय क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हें पकाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया गया होगा? जिस फल को लोग रोजमर्रा के खानपान का हिस्सा मानते हैं, उसकी गुणवत्ता और उसे पकाने की प्रक्रिया भी सेहत के लिहाज से बेहद अहम है। उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के जांच अभियान में केले पकाने वाले 25 केंद्र बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित पाए गए। प्रदेशभर में 311 राइपनिंग चैंबरों की जांच की गई, 132 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी हुए और गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पांच क्विंटल से अधिक केले नष्ट कराए गए। इन केलों का मूल्य 15 हजार रुपये से अधिक बताया गया है। कार्रवाई ने फल पकाने वाले केंद्रों की निगरानी और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

311 केंद्रों की जांच, 25 बिना वैध लाइसेंस के मिले

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने प्रदेशभर में केले पकाने वाले केंद्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था की पड़ताल की। इस दौरान 25 प्रतिष्ठान बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित होते पाए गए। इसके अलावा 132 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए। जांच में कुछ स्थानों पर साफ-सफाई की कमी, गंदी ट्रे और परिसर के रखरखाव में लापरवाही जैसी खामियां भी सामने आईं। अधिकारियों ने संबंधित संचालकों को कमियां दूर करने और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए।

5 क्विंटल से ज्यादा केले नष्ट, 20 नमूने जांच के लिए भेजे

अभियान के दौरान गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पांच क्विंटल से अधिक केले नष्ट कराए गए। इनकी कीमत 15 हजार रुपये से अधिक बताई गई है। अधिकारियों ने गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच के लिए 20 नमूने भी एकत्र किए, जिन्हें प्रयोगशाला भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नष्ट किए गए केले प्रतिबंधित रसायनों से पकाए गए थे या सभी निरीक्षित केंद्रों पर ऐसी प्रक्रिया अपनाई जा रही थी।

केले जल्दी पकाने के चक्कर में कौन-सा रसायन बन सकता है खतरा?

व्यावसायिक स्तर पर केले पकाने के लिए एथिलीन गैस का नियंत्रित परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाता है। निर्धारित मानकों के अनुरूप इसका उपयोग फल पकाने की स्वीकृत प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत प्रतिबंधित है। इससे निकलने वाली एसिटिलीन गैस के साथ हानिकारक अशुद्धियों का जोखिम भी हो सकता है।

कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फोरस के हानिकारक यौगिक मौजूद हो सकते हैं। इनके संपर्क में आने से सिरदर्द, चक्कर, उल्टी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि फलों को कृत्रिम रूप से पकाने में प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया जाता है। हालांकि, केवल केले का रंग, आकार या चमक देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि उसे किस तरीके से पकाया गया है।

सेहत के लिए फायदेमंद केला, लेकिन गुणवत्ता की अनदेखी पड़ सकती है भारी

केला ऊर्जा देने वाला पौष्टिक फल है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, विटामिन बी6 और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। संतुलित आहार में इसका सेवन शरीर को ऊर्जा देने और सामान्य पाचन क्रिया बनाए रखने में मदद कर सकता है। लेकिन फल की गुणवत्ता, स्वच्छता और उसे पकाने की प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

यदि फलों को प्रतिबंधित रसायनों के संपर्क में लाया जाए या गंदे उपकरणों और अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा जाए, तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए सुरक्षित फल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी केवल उपभोक्ता की सावधानी पर नहीं छोड़ी जा सकती। फल पकाने वाले केंद्रों में नियमों का पालन, साफ-सफाई और नियमित निरीक्षण भी जरूरी हैं।

बाजार में केला खरीदते समय कैसे बरतें सावधानी?

केले खरीदते समय देखें कि फल साफ-सुथरी जगह पर रखे गए हों। सड़न, दुर्गंध या स्पष्ट रूप से खराब दिखाई देने वाले फल न खरीदें। केवल एक समान पीला रंग या चमक देखकर यह न मानें कि केला रसायन से पकाया गया है, क्योंकि बाहरी रंग इसका प्रमाण नहीं है। खाने से पहले केले को साफ पानी से धोना और फिर छिलका उतारना अच्छी स्वच्छता की आदत है।

अब निगरानी और कार्रवाई पर टिकी नजर

खाद्य सुरक्षा विभाग के इस अभियान में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि फल पकाने वाले केंद्रों की नियमित निगरानी क्यों जरूरी है। बिना वैध लाइसेंस कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, स्वच्छता संबंधी कमियों को दूर कराना और नमूनों की प्रयोगशाला जांच खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के अहम हिस्से हैं। अब 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका पालन भी सुनिश्चित किया जाए।

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