ऑनलाइन फीडिंग की गलती का खामियाजा किसानों को नहीं भुगतना होगा, हाईकोर्ट ने गेहूं के बकाया भुगतान का दिया आदेश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गेहूं खरीद केंद्र पर अधिकारी की लापरवाही और ऑनलाइन फीडिंग में हुई गलती का नुकसान किसानों पर डालने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मऊ के लाखीपुर गेहूं खरीद केंद्र पर अपनी उपज बेचने वाले आठ किसानों को बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के एक महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने श्रवण कुमार और सात अन्य की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचियों के अनुसार, उन्होंने रबी विपणन सत्र 2021-22 में लाखीपुर खरीद केंद्र पर न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत गेहूं बेचा था।

आठ किसानों ने क्रमशः 42, 27, 35, 23, 20, 40, 24 और 20 क्विंटल गेहूं खरीद केंद्र पर दिया था। केंद्र प्रभारी की ओर से किसानों को गेहूं की रसीदें भी दी गईं, लेकिन उनकी उपज की ऑनलाइन फीडिंग नहीं की गई। ऑनलाइन रिकॉर्ड में खरीद दर्ज नहीं होने के कारण किसानों को उनकी उपज का भुगतान नहीं मिल सका।

जांच में खरीद की रसीदें मिलीं, अधिकारी पर हुई कार्रवाई

मामले की जांच में सामने आया कि किसानों से गेहूं खरीदने की रसीदें मौजूद थीं, लेकिन उनकी ऑनलाइन प्रविष्टि नहीं की गई थी। जांच में खरीद केंद्र प्रभारी यासिर आरफात को इसके लिए जिम्मेदार माना गया। उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें निलंबित भी कर दिया गया।

राज्य की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि गेहूं खरीद नीति के तहत ई-उपार्जन प्रणाली में ऑनलाइन प्रविष्टि करना अनिवार्य है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में खरीद दर्ज नहीं होने की स्थिति में केवल हस्तलिखित रसीदों के आधार पर किसानों को भुगतान नहीं किया जा सकता।

किसानों की गलती नहीं तो ऑनलाइन रिकॉर्ड का लाभ उनके खिलाफ नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन प्रविष्टि नहीं होने के लिए किसान जिम्मेदार नहीं थे। यदि खरीद केंद्र प्रभारी का दायित्व ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करना था और उसने ऐसा नहीं किया, तो इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में प्रविष्टि नहीं होने का लाभ किसानों के खिलाफ नहीं उठाया जा सकता। कोर्ट ने इस स्थिति को संस्थागत विफलता माना।

कोर्ट ने यह भी कहा कि खरीद केंद्र पर गेहूं प्राप्त किए जाने और किसानों के दावे की पुष्टि रसीदों तथा विभागीय रिकॉर्ड से होती है। केंद्र प्रभारी के खिलाफ चल रही आपराधिक या विभागीय कार्रवाई को किसानों का भुगतान रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

जिम्मेदार अधिकारी से वसूली कर सकता है राज्य

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ऑनलाइन फीडिंग में लापरवाही के कारण राज्य को किसी तरह का आर्थिक नुकसान हुआ है तो उसकी वसूली कानून के अनुसार जिम्मेदार अधिकारी से की जा सकती है। हालांकि, इसका असर किसानों के बकाया भुगतान पर नहीं पड़ेगा और किसानों को उनकी उपज की रकम स्वतंत्र रूप से देनी होगी।

कोर्ट ने प्रदेशिक सहकारी फेडरेशन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आठों किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए गेहूं की मात्रा का सत्यापन करने के बाद 1975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उनकी बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। यह भुगतान आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के एक महीने के भीतर करना होगा।

 

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