नई दिल्ली: उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होना और चीजें भूलना आम चिंता बन जाती है। ऐसे में डिमेंशिया का खतरा भी लोगों को परेशान करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से सक्रिय रहना और पैदल चलना दिमाग के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। यथार्थ हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं ग्रुप डायरेक्टर न्यूरोलॉजी डॉ. कुणाल बहलानी के अनुसार, रोजाना की वॉक को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके लिए बहुत कठिन व्यायाम की जरूरत नहीं है। आरामदायक जूते पहनकर नियमित रूप से पैदल चलना भी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का एक आसान तरीका है।
वॉक करने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
चलना शुरू करते ही दिल की धड़कन बढ़ती है और शरीर में रक्त का प्रवाह तेज होता है। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले रक्त का प्रवाह भी बढ़ता है। विशेषज्ञ के मुताबिक, शारीरिक गतिविधि दिमाग में ‘ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर’ यानी बीडीएनएफ के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
यह प्रोटीन दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत बनाए रखने और उनके बीच नए संपर्क बनाने में भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
याददाश्त के केंद्र हिप्पोकैम्पस को मिल सकता है फायदा
अल्जाइमर जैसी बीमारियों में दिमाग का हिप्पोकैम्पस प्रभावित होने वाले हिस्सों में शामिल है। यह हिस्सा याददाश्त और सीखने से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंबे समय तक निष्क्रिय जीवनशैली रहने पर उम्र के साथ हिप्पोकैम्पस में होने वाली स्वाभाविक कमी पर भी असर पड़ सकता है।
नियमित रूप से टहलने जैसी शारीरिक गतिविधि इस प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकती है। नियमित गतिविधि रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य और शरीर में सूजन से जुड़े कारकों पर भी सकारात्मक असर डाल सकती है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं।
रोजाना वॉक को ऐसे बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
डॉ. कुणाल बहलानी के मुताबिक, वॉक के लिए दिन का कोई एक तय समय जरूरी नहीं है। आप अपनी दिनचर्या के अनुसार समय चुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, नाश्ते के बाद 20 मिनट टहलना या काम खत्म होने के बाद कुछ देर पैदल चलना शुरू किया जा सकता है।
चलते समय ऐसी गति रखने की कोशिश करें जिससे सांस थोड़ी तेज हो, लेकिन बातचीत करना संभव रहे। अगर संभव हो तो पार्क या पेड़ों वाले रास्ते पर टहलना भी अच्छा विकल्प हो सकता है। बाहर की रोशनी और हरियाली तनाव कम करने में मदद कर सकती है।
निष्क्रिय रहने के बजाय एक्टिव रहना जरूरी
उम्र बढ़ने के साथ शरीर को लगातार सक्रिय रखना दिमाग और शरीर दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रोजमर्रा की गतिविधियों में पैदल चलना शामिल करना एक आसान शुरुआत हो सकती है। हालांकि, डिमेंशिया से बचाव की कोई एक गारंटी देने वाली गतिविधि नहीं है और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
