झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत बुधवार को गांधी ऑडिटोरियम में ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “अवसरों से भविष्य के लिए तैयार स्टार्टअप तक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में सतत स्टार्टअप विचारों का विकास” रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत 178 नवाचार एवं स्टार्टअप विचारों में से शीर्ष 25 विचारों का क्रमिक प्रदर्शन किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा इन चयनित विद्यार्थियों को प्रशंसा-पत्र एवं टोकन ऑफ एप्रिसिएशन प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।


कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, उद्यमिता, समस्या-समाधान क्षमता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भविष्योपयोगी और सतत स्टार्टअप विचार विकसित करने की सोच को प्रोत्साहित करना रहा। इसके लिए विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन नवाचार प्रपत्र साझा कर स्टार्टअप एवं नवाचार संबंधी विचार आमंत्रित किए गए थे। अभियान के तहत कुल 178 छात्र प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनका नौ निर्धारित मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। प्रत्येक विचार की विस्तृत उत्तर-प्रोफाइल भी तैयार की गई।


विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नवाचार विचारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य एवं फार्मेसी, कृषि एवं खाद्य तकनीक, प्रबंधन, कंप्यूटर विज्ञान, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार, ग्रामीण विकास और सामाजिक समस्याओं के समाधान से जुड़े विषय प्रमुख रूप से सामने आए। मूल्यांकन में ‘सॉल्वएआई’, ‘मिस पानीपुरी’, ‘कृषिटेक’, ‘होम मेडिकेशन’ और ‘लिथोस्कैन एआई’ जैसे विचार शीर्ष प्रविष्टियों में शामिल रहे। चयनित प्रविष्टियों में उच्चतम स्कोर 65 अंक रहा।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल रोजगार प्राप्त करने की सोच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार सृजक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज विद्यार्थियों को अपने विचारों की पहचान करने, उन्हें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और भविष्योपयोगी स्टार्टअप में विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है।
आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के निदेशक प्रो. सुनील के. कबिया ने कहा कि इस चैलेंज का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार की सोच, उद्यमशील दृष्टिकोण और समस्या-समाधान की क्षमता को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि 178 विचारों की प्राप्ति विद्यार्थियों की रचनात्मकता, नवीन सोच और नए समाधान खोजने की क्षमता को प्रदर्शित करती है।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं रिवर राफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निपेंद्र भट्ट ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप सोच, नवाचार और उभरते अवसरों के विषय में प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफल स्टार्टअप की शुरुआत अपने आसपास की वास्तविक समस्याओं को पहचानने से होती है। विद्यार्थी यदि इन समस्याओं के व्यावहारिक, सतत और उपयोगी समाधान विकसित करते हैं तो वे इन्हें प्रभावी स्टार्टअप मॉडल में परिवर्तित कर सकते हैं।


विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अभिनव विचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि वित्तीय व्यवहार्यता, संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाजोपयोगी और व्यवहारिक नवाचार विकसित करने का आह्वान किया।


मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिकांत राय ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अवसरों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने विचारों को केवल अवधारणा तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रारूप, उत्पाद और विस्तार योग्य स्टार्टअप में बदलने की दिशा में कार्य करना चाहिए।


विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल अकादमिक शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में नवाचार, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने विचारों को वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में परिवर्तित करने का आह्वान किया।


कार्यक्रम के दौरान 25वें स्थान से प्रथम स्थान तक चयनित शीर्ष 25 नवाचार विचारों का क्रमिक मंचीय प्रदर्शन किया गया। इससे विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नए विचारों को विश्वविद्यालय समुदाय के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन हिटिका यादव ने किया। उन्होंने अतिथियों के स्वागत, वक्ताओं के परिचय, विद्यार्थियों की सहभागिता तथा शीर्ष 25 नवाचार विचारों के प्रदर्शन को प्रभावी ढंग से संयोजित किया।


इस अवसर पर हेमंत चंद्रा, शशांक, चंद्रभान प्रजापति, पर्वत, संभव, प्रथम, मनीष शॉ, जितेंद्र कुमार, साकेत कंचन, डॉ. आशु एवं तरुण द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ ने विद्यार्थियों को “विचार से नवाचार और नवाचार से स्टार्टअप” की दिशा में आगे बढ़ने का प्रभावी मंच प्रदान किया। विश्वविद्यालय की यह पहल युवाओं में आत्मनिर्भरता, नवाचार और उद्यमिता की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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