उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी कोई नया चेहरा उभरता है, तो वह सिर्फ व्यक्ति नहीं होता… वह एक पूरा संकेत होता है। और इस बार संकेत साफ है—महिला, जातीय समीकरण और भावनात्मक कनेक्शन का तिहरा दांव। सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने जब रुक्मणी निषाद को सपा महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया, तो यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं… बल्कि आने वाले चुनावों की स्क्रिप्ट का पहला पन्ना लगा। कौन हैं रुक्मणी निषाद?—जमीन से जुड़ी, संदेश में भारी रुक्मणी निषाद कोई अचानक उभरा नाम नहीं हैं। वो लंबे समय…
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26 और 27 “एक नहीं, दो-दो रामनवमी छुट्टियां! योगी सरकार का ‘डबल प्रसाद’
कभी-कभी सरकारें सिर्फ फैसले नहीं लेतीं… वो माहौल पढ़ती हैं। और इस बार उत्तर प्रदेश में माहौल सिर्फ धार्मिक नहीं था—थोड़ा भावनात्मक, थोड़ा राजनीतिक और थोड़ा “भाई छुट्टी चाहिए” वाला भी था। रामनवमी की तारीख पर ऐसा कन्फ्यूजन फैला कि लोग कैलेंडर से ज्यादा पंडितों की तरफ देखने लगे। ऐसे में जब सीएम Yogi Adityanath ने एक नहीं, बल्कि दो दिन की छुट्टी का ऐलान किया—तो जनता ने इसे आदेश नहीं, “बोनस” समझा। आस्था vs प्रशासन: किसने जीती बाज़ी? रामनवमी—एक ऐसा पर्व जहां भावनाएं, भक्ति और भीड़ तीनों हाई वोल्टेज…
Read More27 साल बाद बरी हुए Raj Babbar! 1996 केस में कोर्ट का बड़ा फैसला
एक फिल्म होती है… जहां हीरो अंत में जीतता है। और एक real life होती है… जहां climax आने में 27 साल लग जाते हैं। कांग्रेस सांसद Raj Babbar के लिए ये मामला कोई scene नहीं था—ये उनकी जिंदगी की सबसे लंबी “pending script” थी। और अब… आखिरकार कोर्ट ने “cut” बोल दिया। क्या था पूरा मामला: वोटिंग बूथ से कोर्ट तक साल 1996… चुनावी गर्मी… और आरोप— एक polling officer के साथ मारपीट और सरकारी काम में बाधा। राजनीति का मैदान कभी-कभी wrestling ring जैसा हो जाता है— जहां आरोप…
Read Moreअब युद्ध है! UPPCS Mains के आखिरी 5 दिन—Game Changer Strategy
29 मार्च… तारीख नहीं—निर्णय का दिन है। अब किताबें नहीं, confidence लिखेगा आपकी कॉपी में। जो 6 महीने में नहीं हुआ… वो अगले 5 दिन में भी हो सकता है—अगर strategy सही है। UPPCS Mains अब knowledge का नहीं… presentation + control + nerve का खेल है। एक्स CMO डॉ. आशुतोष दुबे का बड़ा संदेश “UPPCS सिर्फ एक परीक्षा नहीं, ये मानसिक अनुशासन की ultimate परीक्षा है। मैंने प्रशासन में देखा है कि वही लोग आगे बढ़ते हैं, जो संकट में भी स्पष्ट सोच रखते हैं। इन आखिरी दिनों में students को ‘panic’…
Read Moreपेड़ों की राजनीति या हरियाली क्रांति? 277 करोड़ पौधों का ‘Power Show’
सुबह की हवा में हल्की ठंडक थी… लेकिन इस बार ठंडक मौसम की नहीं, मिशन की थी। उत्तर प्रदेश में हर हाथ में मोबाइल नहीं—पौधा दिख रहा है। कोई फोटो के लिए नहीं लगा रहा… कोई रिकॉर्ड के लिए भी नहीं…बल्कि ऐसा लग रहा है जैसे यूपी ने फैसला कर लिया हो— “अब धूल नहीं, हरियाली उड़ेगी।” लेकिन सवाल अभी भी वही है क्या ये हरियाली जमीनी है… या सिर्फ आंकड़ों की खेती? ‘हरित प्रदेश’ का बड़ा दावा Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने जो आंकड़े पेश किए हैं,…
Read MorePollution Crisis: गाजियाबाद का लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर
सुबह की पहली सांस… जो जिंदगी देती थी, अब वही खतरे का अलार्म बन चुकी है। लोनी में लोग अब हवा नहीं, “जहर” इनहेल कर रहे हैं। आंखों में जलन, गले में आग और फेफड़ों में भारीपन—यह कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि यहां के हर घर की रोजमर्रा की कहानी है। सवाल ये है—क्या ये शहर जिंदा है, या धीरे-धीरे गैस चैंबर बनता जा रहा है? रिपोर्ट का धमाका: WHO के 22 गुना ऊपर ज़हर IQAir की 2025 रिपोर्ट ने लोनी को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित कर दिया…
Read Moreजमीन मेरी, कब्जा उनका… और पुलिस? कासगंज में सिस्टम का ‘काला सच’
कागजों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकार है… लेकिन ज़मीन पर ‘फुल टॉलरेंस’ का खेल चल रहा है। कासगंज के एक किसान की कहानी सिर्फ उसकी नहीं—ये उस सिस्टम की एक्स-रे रिपोर्ट है, जहां न्याय फाइलों में फंसता है और दबंग ट्रैक्टर चढ़ाकर हकीकत लिखते हैं। एक अकेला किसान… चार दिन से फर्द लेकर दफ्तर-दफ्तर भटक रहा है। उधर, उसकी जमीन पर कब्जा करने वाले दबंग आराम से ‘कानून’ को चाय पिला रहे हैं। सवाल सीधा है—क्या कानून वाकई अंधा है, या आंखें बंद करने का ठेका दे दिया गया है?…
Read More13 साल मौत से जंग… खुद चुनी विदाई! आखिरी सांस के बाद ‘जिंदा’ रहा हरीश
राजनगर एक्सटेंशन की उस शाम में सिर्फ सन्नाटा नहीं था… वहां एक कहानी खत्म हुई थी—धीरे-धीरे, चुपचाप, लेकिन इतनी गहरी कि हर आंख नम हो जाए। 33 साल का एक युवक, जिसने 13 साल तक जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए हर सांस उधार में जी, आखिरकार खुद अपनी विदाई का फैसला कर गया। यह सिर्फ एक मौत नहीं थी… यह सिस्टम, परिवार, और इंसानी जज़्बात की सबसे कठिन परीक्षा थी। 13 साल पहले की वो गिरावट… जिसने सब छीन लिया 2013… एक साधारण दिन। एक युवा इंजीनियरिंग स्टूडेंट,…
Read Moreगाजियाबाद! मां के शव के साथ 48 घंटे… फिर 13वीं मंजिल से छलांग
Ghaziabad की एक हाईराइज सोसाइटी…दरवाजा बंद… फोन खामोश…अंदर एक मां की लाश, जो दो दिन से वहीं पड़ी थी…और एक बेटा, जो उसी घर में सांस ले रहा था…फिर अचानक 13वीं मंजिल से गिरती एक परछाईं। ये खबर नहीं है…ये शहर के बीचों-बीच पनपता हुआ अकेलापन है। क्या हुआ उस दिन: टाइमलाइन में त्रासदी 19 मार्च—एक तारीख, जो अब उस सोसाइटी के लिए सिर्फ कैलेंडर नहीं, एक दहशत बन चुकी है। 42 साल का राजवीर… पेशे से ज्योतिषी…अपनी 70 साल की मां के साथ रहता था। मां की मौत हो…
Read Moreपरम सुख Book Release: स्वामी प्रेमानंद जी की जीवन गाथा ने मचाई हलचल
वृंदावन की गलियों में भक्ति का संगीत अक्सर गूंजता है, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ है. कोई कीर्तन नहीं, कोई रासलीला नहीं… बल्कि एक किताब ने हलचल मचा दी है. ‘परम सुख’—नाम सुनते ही लगता है जैसे जीवन का कोई सीक्रेट कोड मिल गया हो. और जब यह किताब उस संत पर हो जिसने 13 साल की उम्र में घर छोड़कर भगवान की तलाश को अपना करियर बना लिया, तो कहानी अपने आप ‘ट्रेंडिंग’ बन जाती है. कौन हैं स्वामी प्रेमानंद जी? कानपुर के एक साधारण परिवार से निकले…
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