नई दिल्ली: खाना खाने के बाद छाती में जलन होना आम परेशानी लग सकती है, लेकिन हर बार इसे गैस या अपच मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। फोर्टिस अस्पताल मानेसर के वरिष्ठ सलाहकार गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. अभिनंदन मिश्र के मुताबिक, कई मामलों में इसके पीछे गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज यानी GERD हो सकती है।
इस स्थिति में पेट की अम्लीय सामग्री वापस भोजन नली में पहुंच जाती है। इससे छाती के बीचों-बीच जलन, मुंह में खट्टा पानी आना या खाना वापस ऊपर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खाना खाने के बाद पेट भरने से उसके अंदर दबाव बढ़ता है, जिससे रिफ्लक्स की परेशानी बढ़ सकती है।
इन वजहों से बढ़ सकता है सीने में जलन का खतरा
मसालेदार और तला-भुना खाना: अधिक तेल और मिर्च वाले भोजन से एसिडिटी बढ़ सकती है और भोजन नली के निचले हिस्से का वाल्व ढीला पड़ सकता है।
खाने के तुरंत बाद लेटना: भोजन करने के तुरंत बाद बिस्तर पर जाने से गुरुत्वाकर्षण का असर कम हो जाता है और पेट का एसिड ऊपर भोजन नली की ओर आ सकता है।
ओवरईटिंग: एक बार में जरूरत से ज्यादा खाना खाने से पेट पर दबाव बढ़ता है। इससे एसिड के ऊपर की ओर आने की संभावना बढ़ सकती है।
कैफीन, सिगरेट और शराब: चाय, कॉफी, वातित पेय, सिगरेट और शराब का सेवन भी भोजन नली के निचले हिस्से के वाल्व को प्रभावित कर सकता है।
मोटापा और पेट पर दबाव: अधिक वजन या गर्भावस्था के दौरान पेट के अंदर दबाव बढ़ने से भी एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है।
बार-बार होने वाली जलन को न करें नजरअंदाज
कभी-कभार छाती में जलन होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह परेशानी सप्ताह में दो या उससे अधिक बार होती है, तो इसे सिर्फ गैस मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
लंबे समय तक नियंत्रित न होने वाली GERD के कारण भोजन नली में सूजन, घाव और संकुचन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में बैरेट्स एसोफैगस की स्थिति भी विकसित हो सकती है, जो आगे चलकर कैंसर के जोखिम से जुड़ी हुई है।
जलन से राहत के लिए किन बातों का रखें ध्यान
खाने और सोने के बीच कम से कम 2 से 3 घंटे का अंतर रखना मददगार हो सकता है। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बचना चाहिए और उन खाद्य पदार्थों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें खाने के बाद बार-बार जलन होती है।
अगर सीने में जलन बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर इसके कारण की जांच कराना जरूरी है।
