लखनऊ की बाढ़ में डूबी बरसों की कमाई, घर-दुकान और गाड़ियां पानी में समाईं; सीएम योगी ने पीड़ितों से जाना हाल

लखनऊ: गोमती नदी की बाढ़ ने राजधानी के फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। घरों, दुकानों और वाहनों के साथ लोगों की बरसों की मेहनत से जुटाई गृहस्थी भी पानी में डूब गई है। हालात ऐसे हैं कि एक लाख से अधिक आबादी पलायन को मजबूर हो गई है। कई परिवारों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता नुकसान का आकलन नहीं, बल्कि दो वक्त के भोजन और सिर पर छत की है। सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में हर तरफ बेबसी और परेशानी का मंजर दिखाई दिया। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। रक्षा मंत्री और सांसद राजनाथ सिंह ने भी फोन पर अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली।

फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला समेत कई इलाकों में करोड़ों रुपये की गृहस्थी, दुकानें, वाहन और घरेलू सामान पानी में डूबे हैं। कई परिवार ट्रैक्टरों पर सामान लादकर सुरक्षित जगहों की ओर जाते दिखाई दिए। कोई घर से फ्रिज निकालने में जुटा था तो कोई बच्चों की किताबें और जरूरी दस्तावेज बचाने की कोशिश कर रहा था।

महंगी कारों से लेकर घरेलू सामान तक पानी में डूबा

फैजुल्लागंज की गलियों में महंगी कारें और दोपहिया वाहन पानी में डूबे नजर आए। घरों में रखा फर्नीचर, फ्रिज, टीवी, कपड़े और जरूरी कागजात भी खराब हो चुके हैं। दुकानों के बेसमेंट पानी से भर गए हैं और व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का अंदेशा है।

जलभराव के कारण कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हैं। वहीं कई लोग अपने घर और सामान की स्थिति देखने के लिए भी नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं।

नावों की कमी, घरों तक पहुंचना भी मुश्किल

बाढ़ का पानी इतना बढ़ गया है कि कई इलाकों में लोगों के लिए नाव ही घरों तक पहुंचने का सहारा बची है। लेकिन जरूरत के मुकाबले नावें कम होने से लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

कुछ जगहों पर नावें गलियों में खड़ी दिखाई दीं, जबकि जरूरतमंद लोग उनके आने का इंतजार करते रहे। कई परिवार सिर्फ यह देखने के लिए नाव तलाशते रहे कि उनके घर की दीवारें और अंदर रखा सामान कितना सुरक्षित है।

अन्नपूर्णानगर में बाढ़ में फंसे बुजुर्ग की मौत

फैजुल्लागंज के अन्नपूर्णानगर में करीब दो सप्ताह से बीमार 72 वर्षीय बंशी लाल कई दिनों से बाढ़ के पानी में फंसे थे। सोमवार सुबह इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक इलाके में करीब आठ फीट पानी भरने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पा रहा था।

परिवार ने मदद के लिए कई बार गुहार लगाई थी। सोमवार को प्रशासन की मदद से नाव उपलब्ध होने के बाद परिजन शव को बाहर ले गए और अंतिम संस्कार किया।

सीएम योगी ने किया हवाई सर्वेक्षण, बाढ़ पीड़ितों से भी मिले

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फैजुल्लागंज से नैमिष तक हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद वह बख्शी का तालाब क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पहुंचे और उनका हाल जाना। उन्होंने राहत सामग्री बांटी और स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टरों से दवाओं तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों से शासन की ओर से मिल रही राहत सामग्री, अन्न और चिकित्सा सुविधाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर चॉकलेट भी दी।

अक्टूबर में आई बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को फैजुल्लागंज से नैमिष तक नदी के किनारे का सर्वे कराने और तटबंध बनवाने का निर्देश दिया। उन्होंने गांवों से बरसात का पानी निकालने के लिए पंपिंग सेट की व्यवस्था कराने को भी कहा। सिंचाई विभाग को इन कार्यों का प्रस्ताव तैयार कर जल्द काम शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

राजनाथ सिंह ने फोन पर ली बाढ़ की जानकारी

मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुबह फोन कर बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताई और जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है और धनराशि जारी कर जल्द काम आगे बढ़ाया जाएगा।

सीएम ने यह भी कहा कि एलडीए की ओर से ग्रीन कॉरिडोर बनवाया गया है, जो सड़क के साथ सुरक्षा के लिहाज से भी काम कर रहा है।

स्कूल और मैरिज हॉल में ठहरने की अपील

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों से खुले में रात बिताने के बजाय स्कूलों और मैरिज हॉल में ठहरने की अपील की। अधिकारियों को राहत केंद्रों पर गर्म भोजन, बच्चों के लिए दूध और गर्भवती महिलाओं के लिए पोषक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही पालतू पशुओं के लिए चारा, भूसा और चोकर की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

हर परिवार के लिए राशन और पशुओं के चारे की व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। बाढ़ प्रभावित गांवों और मोहल्लों में प्रत्येक परिवार के लिए सूखा राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

छोटे बच्चों के दूध, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविरों तथा दवाओं की व्यवस्था के साथ गाय, बकरी, भैंस और घोड़े समेत पालतू पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बाढ़ प्रभावित स्कूलों में छुट्टी

फैजुल्लागंज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में चार स्कूल बंद करा दिए गए हैं। डीआईओएस देवेन्द्र पाण्डेय के मुताबिक प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि हालात सामान्य होने तक बच्चों को स्कूल न बुलाया जाए।

इस क्षेत्र में संचालित नर्सरी और कक्षा एक से आठवीं तक के निजी स्कूल भी बंद हो गए हैं।

गांवों की सुरक्षा के लिए रात में पेट्रोलिंग

मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि बाढ़ के कारण ग्रामीणों के सुरक्षित स्थानों पर जाने के बाद रात में गांवों की सुरक्षा के लिए चौकीदार, होमगार्ड, पीआरडी और पुलिस की पेट्रोलिंग कराई जाए।

राहत शिविरों और प्रभावित गांवों में रोशनी के लिए पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट की व्यवस्था कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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