26 अप्रैल… एक तारीख नहीं, भारत की कूटनीति का टेस्ट है। एक तरफ अमेरिका की सख्ती… दूसरी तरफ ईरान में भारत का अरबों का सपना। और बीच में फंसा है वो पोर्ट, जो सिर्फ बंदरगाह नहीं… एक रणनीतिक हथियार है। अगर ये छूट खत्म होती है… तो सवाल सिर्फ एक प्रोजेक्ट का नहीं, भारत की पूरी क्षेत्रीय रणनीति का होगा। चाबहार: पोर्ट नहीं, पावर मूव Chabahar Port सिर्फ जहाजों का ठिकाना नहीं है…ये भारत की “साइलेंट स्ट्राइक” है। यह वही रास्ता है जिससे भारत, पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया…
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भारत पर क्यों भरोसा कर रहा ईरान? 5 वजहें जो आपको चौंका देंगी”
जंग के बीच भरोसा सबसे महंगी चीज होती है। और इस वक्त मिडिल ईस्ट की आग में एक नाम बार-बार उभर रहा है—भारत। Mohammad Fattahali का बयान सिर्फ एक diplomatic gesture नहीं, बल्कि एक संकेत है कि जब दुनिया बंट रही है, भारत बातचीत का पुल बन रहा है। “ईरान का भरोसा” – क्या है असली वजह? जब Iran जैसे देश, जो अमेरिका और इजरायल से सीधे टकराव में है, भारत को mediator मानने लगे, तो यह साधारण बात नहीं। India की ताकत उसकी neutrality नहीं, बल्कि calibrated balance है। भारत किसी…
Read Moreचाबहार पर राहत — अमेरिका ने भारत को दी 6 महीने की ‘Sanction Holiday
ईरान के चाबहार बंदरगाह पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को 6 महीने की अस्थायी छूट मिली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया कि — “हमें उस बंदरगाह पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की अवधि के लिए छूट दी गई है।” यह राहत ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका ने सितंबर 2024 के अंत में चाबहार से जुड़े कई संस्थानों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। भारत-ईरान की साझेदारी: व्यापार और रणनीति का संगम भारत ने ईरान के साथ 13 मई 2024 को चाबहार पोर्ट…
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