लखनऊ: बड़े निजी अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद और बिक्री को लेकर गंभीर अनियमितताओं की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (UPFSDA) की 26 औषधि निरीक्षकों की टीम ने शहर के 12 प्रमुख निजी अस्पतालों में एक साथ औचक छापेमारी की। जांच के दौरान दवाओं की खरीद कीमत और मरीजों से वसूली जा रही रकम में बड़े अंतर की बात सामने आई।
जांच के बाद अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओपीडी फार्मेसी को बंद करने का आदेश दिया गया, जबकि ग्लोब हॉस्पिटल के एक अवैध भंडारण स्थल को सील कर दिया गया। विभाग ने 38 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे हैं और अस्पतालों तथा दवा आपूर्तिकर्ताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
60 से 70 फीसदी कम कीमत पर खरीद, मरीजों से पूरी MRP वसूली का आरोप
जांच में सामने आया कि अत्यधिक खपत वाली और जीवनरक्षक दवाओं को थोक विक्रेताओं से 60 से 70 फीसदी तक कम कीमत पर खरीदा जा रहा था। इसके बावजूद मरीजों को इन्हीं दवाओं के लिए पूरी एमआरपी या मामूली छूट के साथ बिल दिया जा रहा था।
विभाग अब दवाओं की प्रिंटेड एमआरपी और स्टॉकिस्ट की ओर से अस्पतालों को दिए गए आपूर्ति मूल्य के बीच के अंतर की जांच कर रहा है। अस्पतालों और दवा कंपनियों के बीच तालमेल को लेकर भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता की जांच के लिए 38 नमूने सील कर सरकारी प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
अपोलोमेडिक्स की OPD फार्मेसी बंद, जरूरी रिकॉर्ड नहीं मिले
कानपुर रोड स्थित अपोलो सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जांच के दौरान ड्रग्स रूल्स 1945 के तहत जरूरी कई रिकॉर्ड नहीं मिले। इनमें स्टॉक लेजर, भर्ती मरीजों यानी आईपीडी की फाइलें और गंभीर श्रेणी की शेड्यूल एच1 दवाओं की खरीद-बिक्री का अनिवार्य रजिस्टर शामिल है।
इसके अलावा दवाओं के बिलों पर बैच नंबर भी दर्ज नहीं किए गए थे। इन खामियों के बाद टीम ने ओपीडी फार्मेसी को तत्काल बंद करने का आदेश दिया।
राजाजीपुरम स्थित ग्लोब हॉस्पिटल प्रबंधन दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित वैधानिक रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में बिना अनुमति दो अलग-अलग स्थानों पर दवाओं का भंडारण किए जाने की बात सामने आई। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत इनमें से एक परिसर को मौके पर ही सील कर दिया गया।
मेदांता, चरक, शेखर और रीजेंसी में भी मिलीं अनियमितताएं
मेदांता लखनऊ और चरक हॉस्पिटल, दुबग्गा में महंगी दवाओं के विकल्प के तौर पर मरीजों को उपलब्ध कराए जाने वाले सस्ते और जेनेरिक साल्ट यानी सब्स्टीट्यूट फार्मेसी में नहीं मिले।
रीजेंसी हॉस्पिटल, खुर्रम नगर में बिलों पर दर्ज बैच नंबर और मौके पर मौजूद भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया। इसके अलावा बिलों पर फर्म का सही पता भी दर्ज नहीं था।
शेखर हॉस्पिटल, इंदिरा नगर में शेड्यूल एक्स श्रेणी की संवेदनशील दवाओं की खरीद फार्मेसी लाइसेंस के बजाय चिकित्सक के नाम पर किए जाने की बात सामने आई।
तलवार स्किन इंस्टीट्यूट, इंदिरा नगर में फार्मासिस्ट मौके पर मौजूद नहीं था। यहां मोबाइल ऐप के जरिए बिना वैध रिकॉर्ड के दवाएं मंगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
मिड्लैन्ड हॉस्पिटल, महानगर में कोल्ड-चेन के रखरखाव और स्टॉक लेजर के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया।
बिना जरूरी विवरण के दवाओं की बिक्री का भी मामला
डॉ. केएनएस मेमोरियल हॉस्पिटल में मरीजों के पते, डॉक्टर के पंजीकरण और जरूरी लाइसेंस नंबर के बिना दवाएं बेचे जाने की बात सामने आई।
वहीं अवध हॉस्पिटल, आलमबाग में थोक लाइसेंस नहीं होने का दावा किए जाने के बावजूद कंपनियों से दवाओं की खरीद के दस्तावेज मिले।
दवा सप्लायरों और निर्माताओं तक पहुंचेगी जांच
प्रदेश में 24 सितंबर से शुरू किए गए विशेष अभियान के पहले चरण में 16 जिलों के 21 मेडिकल कॉलेजों की भी जांच की गई थी।
UPFSDA अधिकारियों के अनुसार, अभियान के तहत अस्पतालों को दवाओं की आपूर्ति करने वाले थोक डीलरों के खातों और गोदामों की भी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच का दायरा दवा सप्लायरों से लेकर निर्माताओं तक बढ़ाया जाएगा।
