जैसलमेर: विश्व पशु दिवस के मौके पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम इलाके में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षियों को जंगल में छोड़ा। ये दोनों पक्षी कैप्टिव-ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत पाले-पोसे गए थे। इस दौरान वन विभाग की पूरी टीम भी मौजूद रही।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ने के बाद भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क के सैम क्षेत्र में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ना संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है।
करीब एक दशक की मेहनत से मिली बड़ी कामयाबी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की करीब एक दशक की लगातार मेहनत से संभव हुई है। इन सभी ने राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को दोबारा बसाने के लिए वर्षों तक काम किया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और लगातार सहयोग के लिए आभार जताया। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के सहयोग से वैज्ञानिक समुदाय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड समेत सभी प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर पा रहा है।
रामदेवरा के ब्रीडिंग सेंटर भी पहुंचे थे भूपेंद्र यादव
इससे एक दिन पहले शनिवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया था। यहां उन्होंने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए काम कर रहे युवा शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों से मुलाकात की।
उन्होंने संरक्षण कार्यक्रम में शामिल शोधकर्ताओं की लगन और मेहनत की सराहना की। मंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर वर्षों से पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जा रहा है। इसके बाद सैम इलाके में कैप्टिव-ब्रीडिंग से तैयार किए गए दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा गया।
लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों में शामिल है ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत की प्रमुख और गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों में शामिल है। इसके संरक्षण के लिए सरकारी एजेंसियां, वैज्ञानिक, वन अधिकारी और स्थानीय समुदाय मिलकर विशेष संरक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं।
कैप्टिव-ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए गए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को दोबारा जंगल में छोड़ना इस संरक्षण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य इस खास पक्षी प्रजाति को राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में फिर से बसाने और उसके संरक्षण को मजबूत करना है।
