नई दिल्ली: स्मार्टफोन और सोशल मीडिया आज पढ़ाई, काम, मनोरंजन और लोगों से जुड़े रहने का अहम जरिया बन चुके हैं। लेकिन कई बार हम बिना किसी खास जरूरत के बार-बार फोन अनलॉक करने लगते हैं। एक वीडियो देखने के बाद दूसरा अपने आप शुरू हो जाता है और देखते ही देखते कुछ मिनट आधे घंटे या उससे ज्यादा समय में बदल जाते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली सामग्री अक्सर हमारी पसंद और रुचि के हिसाब से तय होती है। इससे नई चीजें सीखने और अपनी पसंद का कंटेंट देखने में सुविधा होती है, लेकिन यही व्यवस्था धीरे-धीरे आदत का रूप भी ले सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि फोन हम अपनी जरूरत से चला रहे हैं या डिजिटल प्लेटफॉर्म की बनाई आदत के कारण बार-बार स्क्रीन पर लौट रहे हैं।
कभी खत्म नहीं होता कंटेंट
कई डिजिटल प्लेटफॉर्म इस तरह तैयार किए गए हैं कि उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें। इनफिनिट स्क्रॉल इसका एक उदाहरण है, जिसमें सामग्री खत्म नहीं होती और उपयोगकर्ता लगातार नीचे स्क्रॉल करता रहता है।
इसी तरह ऑटोप्ले सुविधा में एक वीडियो खत्म होते ही अगला वीडियो अपने आप चलने लगता है। कई बार व्यक्ति का अगला वीडियो देखने का इरादा नहीं होता, फिर भी वह स्क्रीन पर मौजूद सामग्री को देखता रहता है।
नोटिफिकेशन बार-बार खींचते हैं फोन की ओर
मैसेज, लाइक, कमेंट और नई पोस्ट के नोटिफिकेशन भी फोन चेक करने की आदत को बढ़ा सकते हैं। जैसे ही कोई सूचना आती है, हम तुरंत फोन उठाकर उसे देखने लगते हैं।
धीरे-धीरे ऐसा हो सकता है कि फोन जरूरत के लिए नहीं, बल्कि हर नए नोटिफिकेशन के जवाब में खोला जाने लगे। यही आदत डिजिटल इस्तेमाल को जरूरत से ज्यादा बढ़ा सकती है।
पहचानें ये ‘डिजिटल हुक्स’
लाइक और फॉलोअर्स की संख्या, स्ट्रीक्स, रिमाइंडर और आपकी पसंद के मुताबिक दिखाई जाने वाली सामग्री ऐसे कई तरीके हैं जो उपयोगकर्ता को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखते हैं। इन्हें ‘डिजिटल हुक्स’ कहा जाता है।
ऐसे में खुद से यह सवाल करना जरूरी है कि क्या आप वास्तव में किसी सामग्री को देखना चाहते हैं या सिर्फ इसलिए उसे देख रहे हैं क्योंकि अगला वीडियो या पोस्ट आपकी स्क्रीन पर आ गया है।
बिना मकसद स्क्रॉल करने से बचें
डिजिटल संतुलन का मतलब स्मार्टफोन या सोशल मीडिया को पूरी तरह छोड़ देना नहीं है। जरूरी यह है कि तकनीक का इस्तेमाल आपकी जरूरत के अनुसार हो।
फोन उठाने से पहले खुद से पूछें कि इसका उद्देश्य क्या है। पढ़ाई, काम, जरूरी जानकारी या बातचीत के लिए फोन का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है, लेकिन बिना किसी उद्देश्य के लगातार स्क्रॉल करने से बचना बेहतर है।
स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अपनाएं ये तरीके
लगातार लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों और रोजमर्रा की दिनचर्या पर असर पड़ सकता है। डिजिटल इस्तेमाल को संतुलित करने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं।
सोशल मीडिया का समय तय करें
गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर दें और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए दिन में एक निश्चित समय तय करें। सोने से पहले फोन को अपने से दूर रखना और रात में गैर-जरूरी अलर्ट बंद या शांत करना भी मददगार हो सकता है।
बीच-बीच में लें स्क्रीन से ब्रेक
लगातार स्क्रीन देखते रहने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है। पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और कुछ समय स्क्रीन से दूर बिताने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
ब्रेक के दौरान थोड़ी देर टहलना, परिवार के साथ समय बिताना, दोस्तों से आमने-सामने बातचीत करना, किताब पढ़ना या प्रकृति के बीच समय बिताना डिजिटल संतुलन बनाने में मदद कर सकता है।
अपनी जरूरत और मकसद समझें
तकनीक अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा और बिना उद्देश्य इस्तेमाल परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि आप तकनीक का इस्तेमाल कब और क्यों कर रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम को अपना समय तय करने देने के बजाय अपनी जरूरतों और लक्ष्यों के आधार पर फोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें। यही डिजिटल संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम हो सकता है।
