यूपी पंचायत चुनाव की हलचल तेज: सर्दियों में मिल सकती है ‘गांव की सरकार’, आरक्षण प्रक्रिया से खुला रास्ता

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अटके पंचायत चुनाव को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार द्वारा समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दिए जाने के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के आगे बढ़ने का रास्ता साफ माना जा रहा है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो इस साल सर्दियों में ‘गांव की सरकार’ का गठन संभव है।

ओबीसी आयोग के गठन से आरक्षण प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ
कैबिनेट के फैसले के बाद अब प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इसके लिए गठित समर्पित ओबीसी आयोग रैपिड सर्वे के माध्यम से पिछड़े वर्ग की वास्तविक जनसंख्या का आकलन करेगा, जिसके आधार पर सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा।

आरक्षण तय होने के बाद जारी होगी अधिसूचना
जानकारों के अनुसार आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद चुनाव आयोग विस्तृत कार्यक्रम घोषित करेगा और मतदान की तारीखें तय होंगी।

अक्टूबर-नवंबर में चुनाव की संभावना
यदि सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तो संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2026 तक कराए जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में करीब पांच से सात महीने का समय लग सकता है।

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को होगा समाप्त
प्रदेश में ग्राम प्रधानों का मौजूदा कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य पदों का कार्यकाल भी समाप्ति की ओर है, जिससे पंचायत प्रशासन में नई व्यवस्था लागू करनी होगी।

राजनीतिक दलों के लिए अहम होगा पंचायत चुनाव
हालांकि पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते, लेकिन यह राजनीतिक दलों के लिए अपनी जमीनी ताकत दिखाने का बड़ा मंच माना जाता है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे राजनीतिक तैयारी और जनसमर्थन परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

गांव से लेकर जिला स्तर तक बढ़ी चुनावी सरगर्मी
फैसले के बाद गांव, ब्लॉक और जिला पंचायत स्तर पर संभावित उम्मीदवारों ने सक्रियता बढ़ा दी है। समर्थकों को संगठित करने और जनसंपर्क अभियान शुरू करने की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में हुआ निर्णय
सरकार का यह कदम हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है, जिससे आरक्षण प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिलने की उम्मीद है और चुनाव प्रक्रिया में बाधाएं कम होंगी।

 

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