ज्येष्ठ अमावस्या 2026: 15 या 16 मई? जानिए सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

लखनऊ: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है, जो विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए समर्पित होती है। इस दिन गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब यह तिथि ज्येष्ठ मास में पड़ती है तो इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या 2026 की तिथि को लेकर 15 और 16 मई के बीच संशय बना हुआ है, जिसे लेकर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है।

ज्येष्ठ अमावस्या की सही तारीख क्या है?
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या 2026 की शुरुआत 16 मई 2026 को सुबह 05:13 बजे से होगी और इसका समापन 17 मई 2026 को रात 01:33 बजे होगा। इसी आधार पर ज्येष्ठ अमावस्या का पर्व इस वर्ष 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा।

पूजा और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान-दान के लिए विशेष समय को अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन सुबह 08:55 बजे से लेकर 10:40 बजे तक का समय पूजा, स्नान और दान-पुण्य के लिए शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसी अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में ज्येष्ठ अमावस्या को पितृ शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इसके साथ ही शनिदेव और पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान और तप करने से कई जन्मों के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्या करें ज्येष्ठ अमावस्या पर?
इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काली उड़द, काले तिल, काले जूते, छाता या लोहे के बर्तनों का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। सुबह स्नान के बाद पीपल वृक्ष में जल अर्पित करने और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। शनि दोष से बचाव के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी अत्यंत प्रभावी माना गया है। इसके अलावा काले कुत्तों और कौओं को भोजन कराना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी बताया गया है।

ज्येष्ठ अमावस्या पर किन बातों से बचें?
इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज के सेवन से परहेज करने की सलाह दी गई है। अमावस्या और शनिवार के योग को देखते हुए लोहे की वस्तुओं की खरीदारी से भी बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बाल और नाखून काटना अशुभ माना गया है। इसके अलावा घर में विवाद से बचने और बुजुर्गों का सम्मान करने की भी सलाह दी जाती है। अमावस्या की रात सुनसान स्थानों पर जाने से भी परहेज करने की बात कही गई है।

 

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