नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस युवाओं की प्राथमिकता बन चुकी है। जिम, योग, रनिंग, पिलाटे, वॉकिंग और स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियां अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गई हैं। फिट रहने के लिए लोग डाइट, प्रोटीन, सप्लीमेंट्स और हाइड्रेशन पर खास ध्यान देते हैं, लेकिन अक्सर एक बेहद जरूरी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं और वह है पूरी नींद। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि शरीर को पर्याप्त आराम और गहरी नींद नहीं मिलती, तो वर्कआउट का असर कम हो सकता है और मसल रिकवरी की प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी नींद सिर्फ थकान दूर करने का जरिया नहीं, बल्कि शरीर की रिकवरी और मांसपेशियों के विकास का सबसे अहम हिस्सा है। खासतौर पर जो लोग रोजाना एक्सरसाइज या भारी वर्कआउट करते हैं, उनके लिए 7 से 9 घंटे की नींद बेहद जरूरी मानी जाती है।
नींद की कमी से शरीर पर पड़ता है सीधा असर
विशेषज्ञों के अनुसार जब शरीर को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो ग्रोथ हार्मोन का निर्माण प्रभावित होने लगता है। यही हार्मोन मांसपेशियों की रिपेयरिंग और ग्रोथ में अहम भूमिका निभाता है। नींद अधूरी रहने पर मसल्स को रिकवर होने में ज्यादा समय लगता है और शरीर में लंबे समय तक दर्द और थकान बनी रह सकती है।
इसके अलावा नींद की कमी से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। इससे मांसपेशियों के टूटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और लंबे समय तक की गई मेहनत पर असर पड़ सकता है।
गहरी नींद क्यों मानी जाती है जरूरी
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब व्यक्ति गहरी नींद में होता है, तब शरीर तेजी से रिकवरी मोड में काम करता है। इस दौरान ग्रोथ हार्मोन रिलीज होता है, जो डैमेज मसल टिश्यू को रिपेयर करने और नई मांसपेशियों के विकास में मदद करता है।
अच्छी नींद के दौरान शरीर में प्रोटीन सिंथेसिस की प्रक्रिया भी बेहतर तरीके से होती है। यही प्रक्रिया नई मसल फाइबर को बनाने और पुराने डैमेज टिश्यू को ठीक करने में मदद करती है। यदि नींद पूरी न हो, तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
मसल्स दर्द और सूजन भी हो सकती है कम
पर्याप्त नींद लेने से शरीर में सूजन कम होती है और मांसपेशियों में दर्द व अकड़न से राहत मिलती है। अच्छी नींद शरीर को अगले दिन के वर्कआउट के लिए तैयार करती है और मानसिक फोकस भी बेहतर बनाती है। इससे व्यक्ति की परफॉर्मेंस और स्टैमिना पर सकारात्मक असर पड़ता है।
कम नींद बढ़ा सकती है चोट का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद की कमी केवल रिकवरी ही नहीं, बल्कि शरीर के संतुलन और फोकस को भी प्रभावित करती है। ऐसे में भारी वर्कआउट या ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। शारीरिक और मानसिक थकान के कारण व्यक्ति कई बार एक्सरसाइज के दौरान नियंत्रण खो देता है, जिससे गंभीर चोट भी लग सकती है।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना एक तय समय पर सोने और उठने की आदत डालनी चाहिए। इससे शरीर का प्राकृतिक स्लीप साइकल बेहतर रहता है।
सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाना भी जरूरी माना जाता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
इसके अलावा रात में हल्का भोजन करना, सोने से पहले ध्यान, हल्की स्ट्रेचिंग या किताब पढ़ने जैसी गतिविधियां अपनाना भी बेहतर नींद में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने से करीब दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए, ताकि शरीर को भोजन पचाने का पर्याप्त समय मिल सके।
