बेंगलुरु: केरल में लंबे मंथन के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चला विवाद थमता नजर आ रहा है, लेकिन अब कांग्रेस की मुश्किलें कर्नाटक में बढ़ती दिखाई दे रही हैं। राज्य में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच नेतृत्व को लेकर तनाव फिर तेज हो गया है, जिससे कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ गई है।
पिछले साल भी सामने आया था टकराव
कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संघर्ष की चर्चा कोई नई नहीं है। पिछले साल नवंबर में भी सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर विवाद की खबरें सामने आई थीं। उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने मामले को किसी ठोस फैसले के बिना टाल दिया था, क्योंकि पार्टी का फोकस चुनावी राज्यों पर था।
अब जब केरल का मामला काफी हद तक सुलझ चुका है, तो पार्टी का ध्यान दोबारा कर्नाटक की ओर गया है, जहां राजनीतिक हलचल फिर तेज होती दिख रही है।
कैबिनेट फेरबदल को लेकर बढ़ी सियासी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में फेरबदल और खाली पड़े मंत्री पदों को भरने के पक्ष में हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिए वह सरकार और विधायक दल में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहते हैं।
वहीं दूसरी ओर डीके शिवकुमार अब भी मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद लगाए हुए हैं। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि अगर इस समय कैबिनेट विस्तार हो जाता है, तो नेतृत्व परिवर्तन की उनकी संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं।
सत्ता साझाकरण के कथित समझौते की याद दिला रहा शिवकुमार खेमा
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि शिवकुमार समर्थक कांग्रेस हाईकमान को पहले हुए कथित सत्ता-साझाकरण समझौते की लगातार याद दिला रहे हैं। दूसरी तरफ सिद्धारमैया खेमे को फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाते हुए देखा जा रहा है।
कई विधायक भी कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की संभावनाओं के बीच मंत्री पद की उम्मीद लगाए हुए हैं और इसके लिए सक्रिय लॉबिंग कर रहे हैं।
पोस्टरों ने बढ़ाई अटकलें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय और राज्य के कई हिस्सों में लगे पोस्टरों ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी है। डीके शिवकुमार के जन्मदिन पर लगाए गए कुछ पोस्टरों में उन्हें ‘कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री’ बताया गया। मैसूर में उनके समर्थकों ने ऐसा केक भी काटा, जिसमें उन्हें अगले मुख्यमंत्री के रूप में दिखाया गया।
क्या चाहते हैं सिद्धारमैया और शिवकुमार?
सिद्धारमैया की प्राथमिकता मंत्रिमंडल में फेरबदल, खाली पदों को भरना और सरकार में अपनी स्थिति मजबूत करना मानी जा रही है। साथ ही माना जा रहा है कि वह ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी और स्थानीय निकाय चुनावों तक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे को टालना चाहते हैं।
वहीं डीके शिवकुमार चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी जीत में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका दिया जाए। उनके समर्थकों का दावा है कि सत्ता साझाकरण को लेकर पहले जो चर्चा हुई थी, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
कांग्रेस हाईकमान के सामने मुश्किल फैसला
कांग्रेस नेतृत्व के लिए अब तक फैसले को टालना सबसे सुरक्षित रणनीति रही है। लेकिन दोनों खेमों की ओर से लगातार बढ़ते दबाव और सार्वजनिक होते राजनीतिक संकेतों के बीच अब स्थिति ज्यादा समय तक टाली जाना आसान नहीं माना जा रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चाहे नेतृत्व सिद्धारमैया के हाथ में बनाए रखा जाए या फिर डीके शिवकुमार को मौका दिया जाए, दोनों ही स्थितियों में पार्टी के भीतर किसी न किसी गुट की नाराजगी सामने आ सकती है।
