झांसी,100 से अधिक किसानों ने की सहभागिता, बीएससी कृषि की 60 छात्राओं ने लिया ग्रामीण कृषि कार्य का व्यावहारिक अनुभव
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कृषि विज्ञान संस्थान द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को ग्राम कोछाभांवर स्थित लक्ष्मी गार्डन में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में 100 से अधिक किसानों तथा कृषि विज्ञान संस्थान की बीएससी कृषि चतुर्थ वर्ष की 60 छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से जहां किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई, वहीं छात्राओं को ग्रामीण परिवेश में कृषि की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और किसानों से प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला।
कृषि विज्ञान संस्थान के समन्वयक डॉ. संतोष पांडेय ने किसानों को उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों के चयन, बीज उपचार की वैज्ञानिक विधियों तथा किसान एकता के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि में बेहतर परिणाम के लिए उचित बीज चयन और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। किसान नई कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को संगठित होकर कृषि से जुड़ी समस्याओं के समाधान और उपलब्ध योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
RAWE कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. सत्यवीर सिंह सोलंकी ने मृदा विज्ञान एवं मृदा परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को बताया कि खेती की शुरुआत मिट्टी की प्रकृति और उसकी उर्वरता को समझने से होनी चाहिए। मृदा परीक्षण के आधार पर फसल एवं उर्वरकों का उचित चयन करने से संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन संभव होता है। इससे अनावश्यक उर्वरक प्रयोग कम होता है, कृषि लागत घटती है तथा लंबे समय तक मृदा की उत्पादकता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. महजबी हाशमी ने कृषि में पादप रोग प्रबंधन की भूमिका के साथ छात्राओं की शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने किसानों को फसलों में रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान तथा समय रहते उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रोगों की सही पहचान और उचित समय पर उपचार से फसल को होने वाले बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. अनुराधा झा ने मिश्रित खेती एवं मृदा स्वास्थ्य के विषय में किसानों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि मिश्रित खेती किसानों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करने का प्रभावी माध्यम हो सकती है। एक से अधिक फसलों को योजनाबद्ध तरीके से अपनाने से मौसम एवं बाजार संबंधी जोखिम कम किए जा सकते हैं और भूमि का बेहतर उपयोग भी संभव होता है।
सुश्री अनिदुआ बानो ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीकों और डिजिटल मार्केटिंग की बढ़ती भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान मोबाइल एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर मौसम, फसल प्रबंधन, बाजार भाव, कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं से संबंधित नवीन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से किसान अपने कृषि उत्पादों को पारंपरिक बाजार की सीमाओं से बाहर भी बेहतर उपभोक्ताओं और बाजारों तक पहुंचा सकते हैं।
गोष्ठी के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों के समक्ष खेती, मृदा, फसल रोग, उर्वरक प्रयोग, उत्पादन लागत और बाजार से जुड़ी विभिन्न समस्याएं रखीं। विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक सुझाव दिए। इस संवाद ने किसान गोष्ठी को केवल जानकारीपरक ही नहीं, बल्कि सहभागी भी बनाया।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि RAWE के अंतर्गत बीएससी कृषि चतुर्थ वर्ष की छात्राओं ने आयोजन और संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई। छात्राओं ने किसानों से संवाद कर उनकी कृषि पद्धतियों, समस्याओं और स्थानीय अनुभवों को समझा। इस प्रकार कार्यक्रम ने कक्षा में अर्जित कृषि ज्ञान को ग्रामीण क्षेत्र के व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
गोष्ठी के अंत में किसानों को अमरूद की उच्च गुणवत्ता वाली पौध का निःशुल्क वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को फलदार पौधों के उत्पादन के लिए प्रेरित करना तथा कृषि के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान के जयनारायण तिवारी, अवनीश दुबे, मनीष कुमार, हरपाल सिंह, आस्था गुप्ता एवं नवीन दुबे सहित संस्थान के अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
किसान गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, पादप रोग प्रबंधन, मिश्रित खेती और डिजिटल कृषि से जोड़ना तथा विद्यार्थियों को ग्रामीण कृषि व्यवस्था का प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना रहा।
