एक नारा… और पूरा सियासी मैदान धधक उठा। जिस लाइन ने आजादी की लड़ाई में खून दौड़ाया, वही आज राजनीति में सवाल बन गई। और अब देश पूछ रहा है — गलती थी, या कहानी बदलने की कोशिश? सीएम Yogi Adityanath के बयान ने आग लगाई, और कांग्रेस प्रदेश Ajay Rai ने उस आग को हवा दे दी। ‘खून दो’ वाला नारा: इतिहास या हेरफेर? यह विवाद एक लाइन से शुरू हुआ, लेकिन असर पूरा नैरेटिव हिला रहा है। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” — यह नारा…
Read MoreTag: Subhash Chandra Bose
सुभाष चंद्र बोस: आज़ादी को Option नहीं मानने वाले नेता
आज जब देश सुभाष चंद्र बोस जयंती मना रहा है, तो यह सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक reminder है—कि आज़ादी compromise से नहीं, conviction से मिलती है। नेताजी उन rare नेताओं में थे, जिन्हें सत्ता से ज़्यादा देश की इज़्ज़त की फिक्र थी। Azad Hind Fauj: जब शब्द नहीं, हथियार बोले जहां कई लोग फाइलों और प्रस्तावों में उलझे थे, वहीं बोस ने सीधा मैदान चुना। Azad Hind Fauj केवल एक सेना नहीं थी, बल्कि उस generation की आवाज़ थी जो इंतज़ार नहीं करना चाहती थी। “Give me blood…”…
Read Moreनेताजी की कहानी: जिसने अंग्रेज़ों की नींद उड़ा दी
23 जनवरी 1897 को कटक, ओडिशा में जन्मे सुभाष चन्द्र बोस एक प्रतिभाशाली छात्र थे। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक प्रसिद्ध वकील थे और मां प्रभावती देवी एक धार्मिक महिला थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई Presidency College, Calcutta और फिर Cambridge University, England से की। देशभक्ति का जुनून और कांग्रेस से अलगाव सुभाष जी बचपन से ही राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जॉइन की लेकिन महात्मा गांधी की अहिंसा नीति से पूरी तरह सहमत नहीं थे। 1939 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी खुद की पार्टी बनाई – Forward…
Read More