‘मालदार एकलौता दूल्हा’ चाहिए, पर सास नहीं! रिश्तों के बाजार में नई डिमांड

एक मित्र घर आए। चेहरे पर गंभीरता, आवाज़ में मिठास और दिमाग में कैलकुलेटर। बोले—“बहन के लिए लड़का देखना है… मालदार हो, एकलौता हो।” हमने सोचा ठीक है, आजकल ‘स्टार्टअप पिच’ की तरह रिश्ते भी प्रेजेंट होते हैं। लेकिन असली पंचलाइन तो बाद में आई“और अगर घर में सिर्फ बाप हो तो और भी अच्छा रहेगा… सास होगी तो दिनभर खून पीएगी।” इतना कहते हुए वो हंस रहे थे। और सामने बैठी उनकी पत्नी मतलब भाभी जी के चेहरे के भाव कह रहे थे, “बेटा, आज घर चल… theory और practical…

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तीन बहनें, छलांग और सवाल! Ghaziabad केस में हर एंगल खंगाल रही पुलिस

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में 4 फरवरी को जो हुआ, उसने पूरे शहर को झकझोर दिया। 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी — तीन सगी बहनों ने एक साथ 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। यह सिर्फ एक crime news नहीं, बल्कि आज के urban परिवार, parenting gaps और digital addiction पर बड़ा सवाल है। अस्थि विसर्जन के बाद तेज हुई पूछताछ घटना के बाद बच्चियों का अस्थि विसर्जन दिल्ली में किया गया। उसी दिन पुलिस ने पिता चेतन कुमार और उनकी तीनों पत्नियों…

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सर्वसम्मति का आतंक: जब भीड़ ही बन जाए न्यायाधीश

लोकतंत्र में सबसे खतरनाक शब्द “तानाशाह” नहीं होता, सबसे खतरनाक शब्द होता है — “सब यही मानते हैं।” क्योंकि जब “सब” मानने लगते हैं, तब सोचने की ज़रूरत खत्म हो जाती है। आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँसच का फैसला अदालत या तर्क नहीं, भीड़ का मूड करता है। Majority = Right? यह भ्रम क्यों खतरनाक है बहुमत हमेशा सही हो यह लोकतंत्र का सिद्धांत नहीं, यह भीड़ का आत्मविश्वास है। इतिहास गवाह है कि majority कई बार गलत रही है, और minority ही भविष्य लेकर आई है। लेकिन…

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Best Friend को I Love You कहना पाप कब से हो गया?

एक लड़की अगर अपने male best friend को और एक लड़का अपनी female best friend को सादगी से कह दे — “I love you” तो अचानक माहौल ऐसा बन जाता है जैसे कोई FIR दर्ज हो गई हो। नाक सिकुड़ जाती है, भौंहें तन जाती हैं और जजमेंट की कुर्सी पर पूरा समाज बैठ जाता है। सवाल सीधा है — प्यार बोलना कब से संदिग्ध हरकत बन गया? Love ka Matlab: Romance नहीं, Respect भी होता है हमने “Love” शब्द को इतना narrow कर दिया है कि उसका मतलब सिर्फ अफेयर,…

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ग्वालियर में महिला पेंटिंग से छेड़छाड़ – दीवार धुल गई, दिमाग कब धुलेगा?

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सार्वजनिक दीवार पर बनी महिला पेंटिंग के प्राइवेट पार्ट्स से छेड़छाड़ का मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया। समाधान?पूरी दीवार को सफेद रंग से पुतवा दिया गया। अब सवाल ये नहीं है कि दीवार साफ हुई या नहीं, सवाल ये है—क्या सोच भी साफ हुई? Art पर हमला या Mentality का एक्सपोज़? जिस पेंटिंग का मकसद महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संदेश देना था, उसी पर कुछ लोगों ने अपनी घटिया मानसिकता थोप दी।यह कोई शरारत नहीं, यह symptom है— उस बीमारी का, जो समाज…

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“शादी नहीं तो संन्यास लो!” – Live-In पर भागवत का Social Reality Check

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने बदलते social values पर ऐसा बयान दिया है, जो आज की generation को सोचने पर मजबूर करता है। Live-in relationship को लेकर उन्होंने साफ कहा कि यह convenience तो हो सकती है, लेकिन responsibility का substitute नहीं। उनके शब्दों में, शादी और परिवार केवल personal comfort नहीं, बल्कि society को चलाने वाली foundational unit हैं। “Commitment नहीं चाहिए? Then Choose Sanyas” भागवत का सबसे sharp point यही था कि आज की youth freedom तो चाहती है, लेकिन accountability से दूरी बना…

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बालकनी से फेंके जा रहे ‘Dirty Bomb’, Video देख कहेंगे- धन्य हैं ये लोग!

Varanasi—मोक्ष की भूमि, संस्कृति का केंद्र और आध्यात्मिकता की राजधानी। लेकिन इस बार शहर चर्चा में है अपने घाटों या गलियों की वजह से नहीं, बल्कि एक ऐसे पेड़ को लेकर जो अब सोशल मीडिया पर “Diaper Tree” के नाम से मशहूर हो चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो साबित कर रहा है कि हम तकनीक में चाहे कितना आगे बढ़ जाएं, लेकिन Civic Sense अभी भी बहुत पीछे छूट गया है। फल नहीं, पेड़ पर लटके हैं Used Diapers! वीडियो में दिखता है एक बड़ा-सा सुंदर मकान… पर…

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सोने का कटोरा भी दे दो, सोच अगर भिखारी की हो तो… राम नाम सत्य

भारत में कई बार संसाधन की नहीं, मानसिकता की गरीबी देखने को मिलती है। चाहे मुफ्त का राशन हो, सब्सिडी हो या स्कीम — अगर आदमी की सोच में आत्मनिर्भरता नहीं है, तो सोने की थाली भी परोसी जाए, वो पूछेगा, “साइड में अचार क्यों नहीं?” सनातन के नाम पर स्कैम? CM धामी ने शुरू किया ‘ऑपरेशन कालनेमि भीख सिर्फ पैसे की नहीं होती, सोच की भी होती है “सरकार कुछ करे तो क्यों किया?”“न करे तो ये सरकार निकम्मी है!”मतलब चाहे सिस्टम iPhone दे या ठेला — कुछ लोग…

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भारत चाँद पर पहुँचा, पर दलितों को इंसान समझने से अब भी दूर!

भारत ने चाँद पर कदम रख दिए। वैज्ञानिकों की मेहनत और राष्ट्र का गौरव – हर जगह तारीफ़ हो रही है। लेकिन एक सवाल बार-बार कचोटता है – क्या यही वो देश है जहाँ अब भी किसी इंसान को सिर्फ उसकी जाति के आधार पर नीचा दिखाया जाता है? कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा से गैंगरेप, आरोपी TMCP से जुड़ा पढ़े-लिखे समाज की चुप्पी क्यों? हम गर्व से कहते हैं कि हम “शिक्षित” हैं, आधुनिक हैं। लेकिन जब हमारे आस-पास दलितों को मंदिर में घुसने से रोका जाता है, शादी…

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