कभी कहा जाता था “बेटी को संभालकर रखो”, अब समझदार लोग कहते हैं “बेटे को समझदार बनाओ।” समाज evolve हो रहा है। ऐसे में एक पिता की भूमिका सिर्फ कमाने वाले की नहीं, बल्कि character builder की भी है। बेटे को यह सिखाना जरूरी है कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, संभालना होता है। 1. Respect is the Real Power सबसे पहली नसीहत Respect सबके लिए। चाहे दोस्त हो, सहपाठी हो, colleague हो या partner। Consent क्या होता है, boundaries क्या होती हैं ये बातें घर से ही शुरू होती हैं। हीरो वही…
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“शादी नहीं तो संन्यास लो!” – Live-In पर भागवत का Social Reality Check
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने बदलते social values पर ऐसा बयान दिया है, जो आज की generation को सोचने पर मजबूर करता है। Live-in relationship को लेकर उन्होंने साफ कहा कि यह convenience तो हो सकती है, लेकिन responsibility का substitute नहीं। उनके शब्दों में, शादी और परिवार केवल personal comfort नहीं, बल्कि society को चलाने वाली foundational unit हैं। “Commitment नहीं चाहिए? Then Choose Sanyas” भागवत का सबसे sharp point यही था कि आज की youth freedom तो चाहती है, लेकिन accountability से दूरी बना…
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