एक बयान… और पूरे देश की पहचान पर सवाल! पाकिस्तान की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट Hina Baloch का दावा सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया—“80% आबादी गे है!” यह सिर्फ एक वायरल लाइन नहीं, बल्कि उस समाज के अंदर छिपे डर, दबाव और दोहरी जिंदगी की बहस को सामने लाने वाला विस्फोट है। ‘80% आबादी LGBTQ’—दावा या हकीकत? हिना बलोच का बयान सुनने में जितना चौंकाने वाला है, उतना ही विवादित भी। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान में ज्यादातर लोग अपनी असली यौन पहचान छिपाकर जीते हैं। लेकिन इस…
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सर्वसम्मति का आतंक: जब भीड़ ही बन जाए न्यायाधीश
लोकतंत्र में सबसे खतरनाक शब्द “तानाशाह” नहीं होता, सबसे खतरनाक शब्द होता है — “सब यही मानते हैं।” क्योंकि जब “सब” मानने लगते हैं, तब सोचने की ज़रूरत खत्म हो जाती है। आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँसच का फैसला अदालत या तर्क नहीं, भीड़ का मूड करता है। Majority = Right? यह भ्रम क्यों खतरनाक है बहुमत हमेशा सही हो यह लोकतंत्र का सिद्धांत नहीं, यह भीड़ का आत्मविश्वास है। इतिहास गवाह है कि majority कई बार गलत रही है, और minority ही भविष्य लेकर आई है। लेकिन…
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