निठारी कांड से सुरेंद्र कोली की मौत तक… 20 साल की कहानी में कैसे अनसुलझे रह गए कई सवाल?

नोएडा: बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में आत्महत्या के बाद एक बार फिर देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक निठारी कांड चर्चा में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद हुई इस घटना ने न केवल पूरे घटनाक्रम को फिर सुर्खियों में ला दिया, बल्कि उन सवालों को भी दोबारा सामने खड़ा कर दिया है, जिनका जवाब अब तक नहीं मिल सका है।

सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद खत्म हुई जिंदगी

सुरेंद्र कोली को नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी दोषमुक्त कर दिया था। इससे पहले सह-आरोपी मोनिंदर पंधेर भी अदालत से बरी हो चुके थे। इसके बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आए और हरिद्वार में रहकर चाय का खोखा चलाने लगे। अब उनकी आत्महत्या के बाद निठारी कांड को लेकर कई पुराने सवाल फिर चर्चा में हैं।

कमजोर साक्ष्यों पर अदालत ने उठाए थे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान अदालतों में पुलिस और जांच एजेंसियों की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों पर सवाल उठे। अदालत ने माना कि कई मामलों में पर्याप्त और ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में 12 मामलों में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अंतिम मामले में सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया।

पीड़ित परिवारों की न्याय की उम्मीद अधूरी रही

मामले में आरोपियों के बरी होने के बाद पीड़ित परिवारों ने न्याय व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि आरोपित दोषमुक्त हो गए तो आखिर बच्चों और महिलाओं की हत्या का जिम्मेदार कौन था। इस सवाल का स्पष्ट जवाब आज भी सामने नहीं आ सका है।

2006 में सामने आया था देश को झकझोर देने वाला मामला

29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में एक कोठी के पीछे स्थित नाले से बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। जांच के दौरान कई आरोप लगाए गए, लेकिन अदालत में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो सके।

जांच प्रक्रिया पर भी उठे गंभीर प्रश्न

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि कई महत्वपूर्ण फोरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए जा सके। अदालत ने कुछ मामलों में बरामदगी, कबूलनामे और अन्य साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। यही कारण रहा कि आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।

दो दशक में कई बार बदला मुकदमे का रुख

निठारी कांड में अलग-अलग चरणों में कई अहम कानूनी फैसले आए। विशेष अदालत ने कुछ मामलों में दोषसिद्धि और मृत्युदंड सुनाया। बाद में उच्च न्यायालय ने मृत्युदंड को उम्रकैद में बदला और कई मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया। अंततः सुप्रीम कोर्ट से भी सुरेंद्र कोली को राहत मिल गई।

निठारी कांड की प्रमुख समयरेखा

  • 29 दिसंबर 2006 को निठारी गांव में कंकाल मिलने के बाद मामला सामने आया।
  • जनवरी 2007 में जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई।
  • वर्ष 2009 में विशेष अदालत ने एक मामले में मृत्युदंड सुनाया।
  • वर्ष 2015 में मृत्युदंड को उम्रकैद में बदला गया।
  • 17 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया।
  • नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में भी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया।
  • सितंबर 2026 में हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की आत्महत्या के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया।

 

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