हरिद्वार: निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट से सबूतों के अभाव में बरी किए जाने के बावजूद सामान्य जीवन नहीं मिल सका। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सामाजिक बहिष्कार के कारण वह हरिद्वार में रहकर अपना जीवन बिता रहे थे। हाल ही में उन्होंने भूपतवाला क्षेत्र में किराए पर चाय का खोखा लेकर काम शुरू किया था, जबकि इससे पहले सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र और देहरादून में भी रोजगार की कोशिश की थी।
जिसने दुकान किराए पर दी, उसे नहीं थी असली पहचान की जानकारी
पुलिस जांच में सामने आया कि उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सुरेंद्र कोली ने करीब दो महीने पहले एक चाय का खोखा किराए पर लिया था। खोखे के मालिक राजीव ने पुलिस को बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनका किराएदार निठारी कांड का आरोपित रह चुका है। सुरेंद्र ने अपना नाम केवल सुरेंद्र बताया था और पता अल्मोड़ा का बताया था। आत्महत्या के बाद जब उसकी पहचान सामने आई तो खोखे के मालिक समेत आसपास के लोग हैरान रह गए।
सिडकुल और देहरादून में भी की थी रोजगार की कोशिश
पुलिस की पड़ताल में यह भी सामने आया कि कुछ महीने पहले सुरेंद्र कोली ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में चाय की ठेली लगाई थी। हालांकि वहां उनका काम नहीं चल सका। इसके बाद वह देहरादून चले गए, जहां वह किसी काम-धंधे में लगे रहे। करीब दो महीने पहले वह फिर हरिद्वार लौटे और भूपतवाला में किराए पर चाय का खोखा लेकर काम शुरू किया।
आसपास के लोगों ने बताया, व्यवहार था पूरी तरह सामान्य
भूपतवाला क्षेत्र के लोगों ने पुलिस को बताया कि सुरेंद्र का व्यवहार सामान्य था और किसी को भी उसके अतीत की जानकारी नहीं थी। श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले इस इलाके में वह सामान्य तरीके से चाय का कारोबार कर रहे थे। उनकी पहचान सामने आने के बाद स्थानीय लोग भी हैरानी में पड़ गए।
रोशनाबाद में भी लिया था किराए का कमरा
पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी भी मिली कि सिडकुल क्षेत्र में चाय की ठेली लगाने के समय सुरेंद्र ने रोशनाबाद में किराए पर कमरा लिया हुआ था। वह बीच-बीच में वहां आता-जाता भी था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ समय पहले उनकी मां का निधन हो चुका था और परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं था। इसी वजह से वह हरिद्वार में रह रहे थे।
