मुंबई: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद कार्डियक अरेस्ट को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। 75 साल की उम्र में गोवा स्थित अपने घर पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी। उन्हें सीने में दर्द, तेज पसीना और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें हुईं। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। नाना पाटेकर के निधन के संदर्भ में कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के बीच का अंतर समझना भी जरूरी है, क्योंकि दोनों को अक्सर एक ही बीमारी समझ लिया जाता है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका में रुकावट आ जाती है। इसकी वजह से दिल की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युत गतिविधि अचानक बिगड़ जाती है और दिल शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है।
यानी हार्ट अटैक मुख्य रूप से रक्त प्रवाह में रुकावट से जुड़ी समस्या है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की धड़कन और उसकी विद्युत प्रणाली से जुड़ी गंभीर आपात स्थिति है। हालांकि, गंभीर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट की वजह बन सकता है।
हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये संकेत
हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है। कई लोगों को सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मितली, उल्टी या कमजोरी भी महसूस होती है। दर्द सीने से हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक भी जा सकता है।
कई बार इसके लक्षण अचानक बहुत तेज नहीं होते, बल्कि धीरे-धीरे शुरू होते हैं। इसलिए सीने में असामान्य दर्द या दबाव को सामान्य गैस या थकान समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
कार्डियक अरेस्ट में अचानक बेहोश हो सकता है व्यक्ति
कार्डियक अरेस्ट में स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ती है। व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है। उसकी सामान्य सांस बंद हो सकती है या वह केवल हांफता हुआ नजर आ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है।
यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट में तुरंत मदद मिलना बेहद जरूरी होता है। कुछ ही मिनटों की देरी भी स्थिति को गंभीर बना सकती है।
कार्डियक अरेस्ट आने पर तुरंत क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो, तो सबसे पहले तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए फोन करना चाहिए। इसके बाद सीपीआर शुरू करना जरूरी होता है। अगर एईडी यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर उपलब्ध हो और उसका इस्तेमाल करना आता हो, तो उसकी मदद ली जा सकती है।
कार्डियक अरेस्ट के दौरान सीपीआर और जरूरत पड़ने पर डिफिब्रिलेशन दिल की सामान्य गतिविधि वापस लाने में मदद कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचने का इंतजार करने के बजाय मौके पर ही प्राथमिक मदद शुरू करना अहम होता है।
फिट दिखने के बावजूद हो सकती है दिल की गंभीर समस्या
किसी व्यक्ति का बाहर से फिट और सक्रिय दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसे दिल से जुड़ी कोई समस्या नहीं हो सकती। उम्र बढ़ने के साथ हृदय संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। कई बार दिल से जुड़ी बीमारी के संकेत पहले से स्पष्ट नहीं होते और अचानक गंभीर स्थिति सामने आ सकती है।
नाना पाटेकर के निधन के बाद सामने आए घटनाक्रम ने भी इस बात को चर्चा में ला दिया है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, बेहोशी या शरीर में असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय मदद कई मामलों में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
