बिजनौर: अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की शेरकोट में प्रस्तावित जनसभा की अनुमति रद्द होने के बाद सियासत गरमा गई है। मौर्य ने पुलिस-प्रशासन पर अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि जनसभा की सूचना करीब डेढ़ महीने पहले दी गई थी, ऐसे में कार्यक्रम से एक दिन पहले अनुमति रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है।
जनसभा की तैयारी में 25 लाख रुपये खर्च होने का दावा
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि कार्यकर्ताओं ने जनसभा की तैयारियों पर करीब 25 लाख रुपये खर्च किए थे। जगह-जगह चार पहिया वाहन बुक किए गए थे, लेकिन कार्यक्रम रद्द होने के बाद गाड़ियां रोक दी गईं। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर लगाए गए मंच और पंडाल भी उखाड़े गए। मौर्य ने सवाल उठाया कि इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
गठबंधन को लेकर बोले- अभी कई बैठकें होंगी
गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि अभी सिर्फ पहली बैठक हुई है। पहली बैठक में ही सभी मुद्दे तय नहीं होते। उन्होंने बताया कि बातचीत सकारात्मक और संतोषजनक रही है। आगे भी कई बैठकें होंगी और सीटों को लेकर फैसला समय आने पर किया जाएगा।
भाजपा सरकार पर बेरोजगारी और स्कूल बंद करने का आरोप
मौर्य ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि करोड़ों युवा बेरोजगार हो रहे हैं और सरकारी भर्तियां बंद हैं। उनका आरोप है कि इससे एससी, एसटी और ओबीसी का आरक्षण स्वतः खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों की जिंदगी पांच किलो राशन पर चल रही है। मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक लाख 14 हजार सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद कर चुकी है। उनके मुताबिक, हर 500 मीटर पर शराब की दुकान खुल रही है, जबकि स्कूल बंद किए जा रहे हैं।
ईवीएम और एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयोग की भूमिका शक के घेरे में है। मौर्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची से लोगों के नाम काटे जा रहे हैं।
