गोंडा: पतंजलि के घी की शुद्धता पर सवाल, उत्पादों को लेकर तीखी बयानबाजी और फिर 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा… कुछ दिनों पहले तक मामला खूब गरम था। लेकिन अब कहानी में अचानक मोड़ आ गया है। बाबा रामदेव और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह आमने-सामने बैठे तो विवाद की गर्मी कुछ ही देर में ‘गलतफहमी’ की ठंडक में बदल गई। रामदेव ने कहा कि बृजभूषण के मन में जो गलतफहमियां थीं, बातचीत के बाद वे दूर हो गईं।
जिस घी पर उठ रहे थे सवाल, उसी पर अब सफाई का दौर
विवाद की शुरुआत पतंजलि के घी और दूसरे उत्पादों को लेकर बृजभूषण शरण सिंह के बयानों से हुई थी। गोंडा और बहराइच में उन्होंने पतंजलि के उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। घी की कीमत और उसकी उत्पादन लागत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मिलावट और नकली खाद्य पदार्थों को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।
बयान इतने तीखे हुए कि मामला सिर्फ जुबानी जंग तक नहीं रहा। पतंजलि फूड्स लिमिटेड की ओर से बृजभूषण के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर कर दिया गया। यानी जिस विवाद में कानूनी लड़ाई तक की नौबत आ गई थी, अब उसी की तस्वीर में दोनों साथ नजर आ रहे हैं।
बृजभूषण ने प्रणाम किया और ‘गलतफहमी’ दूर हो गई
मुलाकात के बाद रामदेव ने जो बात बताई, उसमें विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यही रहा। उन्होंने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह ने सुनी-सुनाई बातों और वीडियो के आधार पर कुछ धारणा बना ली थी। बातचीत हुई तो गलतफहमी दूर हो गई।
रामदेव ने बताया कि बृजभूषण ने उन्हें प्रणाम किया और संतों तथा सनातन के प्रति सम्मान जताया। देश के लिए किए जा रहे उनके काम के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया। रामदेव ने भी साफ कर दिया कि वह अब इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
यानी कल तक जिस मामले में सवालों की बौछार थी, आज उसमें बातचीत के बाद ‘गलतफहमी’ शब्द सबसे आगे है।
रामदेव बोले- पतंजलि का घी नकली नहीं, जांच कहीं भी करा लें
विवाद खत्म करने की घोषणा के साथ रामदेव ने पतंजलि के गाय के घी को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पतंजलि का घी नकली नहीं है और न ही पतंजलि की कोई दवा नकली है। उन्होंने घी की जांच किसी भी प्रयोगशाला से कराने की बात कही।
रामदेव ने यह भी दावा किया कि पतंजलि के खिलाफ पिछले कुछ महीनों में भ्रांतियां फैलाई गईं। उनके मुताबिक, पतंजलि की दवाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती हैं और उनके किसी उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं है। ये सभी दावे रामदेव की ओर से किए गए हैं।
बृजभूषण के तेवर थे तल्ख, अब विवाद पर लगा विराम
बृजभूषण शरण सिंह ने बहराइच में पतंजलि के घी की गुणवत्ता और कीमत पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पतंजलि के उत्पादों को लेकर सरकार से ध्यान देने की मांग भी की थी। उनके बयानों के बाद पतंजलि फूड्स की ओर से मानहानि का मुकदमा दायर किया गया।
बृजभूषण ने उस समय मुकदमे से पीछे हटने से इनकार किया था। सितंबर में भी उन्होंने पतंजलि के घी को लेकर अपने सवाल दोहराए थे। ऐसे में अब रामदेव की ओर से विवाद खत्म करने और मानहानि मामले को वापस लिए जाने की बात इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ देती है।
यह विवाद आज का नहीं, 2022 से चलती रही है बयानबाजी
रामदेव और बृजभूषण के बीच पतंजलि को लेकर खींचतान पहले भी सामने आती रही है। 24 नवंबर 2022 को बाराबंकी के एक कार्यक्रम में बृजभूषण ने शुद्ध दूध और घी की जरूरत की बात करते हुए पतंजलि के घी का जिक्र किया था।
इसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर दोनों पक्षों की ओर से बयान सामने आते रहे। एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए बृजभूषण ने आचार्य बालकृष्ण के फोन का भी उल्लेख किया था और कहा था कि इसी बातचीत के बाद मतभेद बढ़े।
एक बयान पर माफी, फिर घी पर सवाल और अब ‘सब साफ’
पिछले साल बलरामपुर में महर्षि पतंजलि के नाम के संदर्भ में दिए गए एक बयान को लेकर भी विवाद हुआ था। बाद में बृजभूषण ने उस बयान पर सफाई देते हुए माफी मांगी थी।
अब एक बार फिर दोनों के बीच तल्खी की जगह सुलह की तस्वीर सामने है। रामदेव का कहना है कि बातचीत से स्थिति स्पष्ट हो गई और गलतफहमियां दूर हो गईं। उन्होंने विवाद को आगे नहीं बढ़ाने की घोषणा की है।
कहानी फिलहाल यहीं आकर ठहरती है—घी पर सवाल से शुरू हुई बयानबाजी, 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे तक पहुंची और अब मुलाकात के बाद ‘गलतफहमी’ दूर होने की बात पर खत्म होती दिखाई दे रही है।
