लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र तय समय से एक दिन पहले ही समाप्त हो गया। गुरुवार तक प्रस्तावित सत्र को बुधवार को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। समाजवादी पार्टी के लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन स्थगित करने की घोषणा की।
हंगामे के कारण समय से पहले खत्म हुआ सत्र
बुधवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायक राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे और विधायक सचिन यादव के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन करते हुए विधानसभा परिसर पहुंचे। विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। दो बार अल्पकालिक स्थगन के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का फैसला सुनाया।
CM योगी ने सपा पर साधा निशाना
सदन स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दी। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार 59 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आई थी, जिसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के लिए कई योजनाएं शामिल थीं, लेकिन विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण इन विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी।
उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने विकास कार्यों में बाधा डालने का प्रयास किया, हालांकि विधानसभा ने अनुपूरक बजट से जुड़ी मांगों को पारित कर दिया है और संबंधित योजनाओं पर जल्द काम शुरू किया जाएगा।
मानदेय और पेंशन से जुड़े प्रस्तावों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, ग्राम चौकीदारों सहित विभिन्न वर्गों के मानदेय में वृद्धि तथा महिला पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के विरोध के बावजूद इन वर्गों के हित में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्पीकर सतीश महाना हुए भावुक
लगातार हंगामे से आहत विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पिछले दिन सदन में जो घटनाक्रम हुआ, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आत्ममंथन करना होगा कि क्या वह इस पद की जिम्मेदारी निभाने के योग्य हैं और पिछले साढ़े चार वर्षों में उनके प्रयास सही दिशा में रहे या नहीं।
महाना ने यह भी नाराजगी जताई कि उनके मना करने के बावजूद कुछ सदस्यों ने सदन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय बताया।
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार को समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा किया था। इसी दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने पोस्टर लहराया। विधानसभा अध्यक्ष की चेतावनी के बावजूद पोस्टर नहीं हटाने पर उन्हें पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इसके बाद मार्शलों और विपक्षी विधायकों के बीच धक्कामुक्की भी हुई।
बुधवार को भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। सपा विधायक पोस्टर लेकर सदन पहुंचे और लगातार नारेबाजी करते रहे। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
