भारतीय क्रिकेट में चयन समिति के नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौजूदा चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर के कार्यकाल को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इसी बीच पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम नए चीफ सेलेक्टर के संभावित दावेदार के तौर पर सामने आया है।
अगरकर के कार्यकाल पर BCCI का फैसला बाकी
अजीत अगरकर ने जुलाई 2023 में भारतीय पुरुष सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष का पद संभाला था। उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर अभी बीसीसीआई की ओर से अंतिम घोषणा नहीं हुई है। 18 सितंबर को हुई बीसीसीआई की 95वीं वार्षिक आम बैठक के बाद उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बताया कि चयनकर्ताओं को लेकर फैसला लेने के लिए पदाधिकारियों को अधिकृत किया गया है।
पार्थिव पटेल के नाम पर चर्चा तेज
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अगरकर और बीसीसीआई के बीच कार्यकाल बढ़ाने पर सहमति नहीं बनती है तो पार्थिव पटेल उनकी जगह लेने के प्रमुख दावेदार हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले करीब छह महीनों से भारतीय क्रिकेट के गलियारों में पार्थिव के नाम पर चर्चा चल रही है।
हालांकि, बीसीसीआई ने अभी पार्थिव पटेल की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जा रहा है।
25 टेस्ट मैचों का अनुभव
पार्थिव पटेल ने भारत के लिए 25 टेस्ट, 38 वनडे और 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। मौजूदा चयन पैनल के सदस्यों में टेस्ट अनुभव के लिहाज से वह सबसे वरिष्ठ सदस्य होंगे, यदि उन्हें चयन समिति का अध्यक्ष बनाया जाता है। शिवसुंदर दास ने 23, प्रज्ञान ओझा ने 24, आरपी सिंह ने 14 और अजय रात्रा ने 6 टेस्ट खेले हैं।
क्रिकेट से संन्यास के बाद भी जुड़े रहे पार्थिव
पार्थिव पटेल ने संन्यास के बाद भी क्रिकेट से अपना जुड़ाव बनाए रखा है। वह गुजरात टाइटन्स के साथ असिस्टेंट और बैटिंग कोच की भूमिका में काम कर चुके हैं और कमेंट्री से भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में चयन समिति की जिम्मेदारी मिलने की स्थिति में उनके सामने कोचिंग और अन्य क्रिकेट भूमिकाओं से जुड़े फैसले भी अहम होंगे।
BCCI जल्द साफ कर सकता है तस्वीर
अजीत अगरकर के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। वहीं बीसीसीआई की ओर से चयनकर्ताओं के संबंध में फैसला लेने का अधिकार पदाधिकारियों को दिए जाने के बाद इस पद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि अगरकर को आगे जिम्मेदारी मिलती है या चयन समिति के नेतृत्व में बदलाव किया जाता है।
