नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच चीन की ओर से भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल की सार्वजनिक रूप से सराहना की गई है। भारत में चीन के नव-नियुक्त रक्षा अधिकारी रियर एडमिरल यू जियान ने कहा कि केरल तट के पास पिछले वर्ष चलाए गए बचाव अभियान को चीन कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान भारतीय बलों ने 12 चीनी नाविकों की जान बचाकर मानवीय सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया।
केरल तट पर चलाया गया था संयुक्त बचाव अभियान
रियर एडमिरल यू जियान ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की 99वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले वर्ष केरल तट के पास एक चीनी मालवाहक जहाज में आग लगने और विस्फोट होने के बाद भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद सभी 12 चीनी क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
चीन ने सार्वजनिक रूप से जताया आभार
चीनी रक्षा अधिकारी ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए इस मानवीय अभियान को चीन हमेशा याद रखेगा। उन्होंने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया।
LAC तनाव के बाद रिश्तों में नरमी के संकेत
यू जियान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वर्ष 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हुई हैं, जिनका उद्देश्य सीमा पर तनाव कम करना और संवाद बनाए रखना रहा है।
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में यू जियान ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत और चीन की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सशस्त्र बलों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शांति मिशनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और कई बलिदान भी दिए हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच साझा हित मतभेदों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हैं और इन्हें आगे बढ़ाने के लिए सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है।
सैन्य और राजनयिक संवाद जारी रखने की बात
चीनी रक्षा अधिकारी ने कहा कि बीजिंग भारत के साथ सैन्य और राजनयिक स्तर पर नियमित संवाद जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, निरंतर बातचीत से आपसी विश्वास मजबूत होगा और द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी, जिसका लाभ दोनों देशों को मिलेगा।
