VIP इलाका! नलों में जहर- जयपुर में सीवर मिला पानी पीकर बीमार लोग

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

जहां से सत्ता चलती है, वहीं से कुछ कदम दूर लोग जहर पी रहे हैं…यह पानी नहीं, सिस्टम की सड़ांध है जो हर घर में घुस चुकी है। Jaipur की सबसे VIP मानी जाने वाली सिविल लाइन्स विधानसभा… जहां मुख्यमंत्री से लेकर कई बड़े मंत्री रहते हैं। लेकिन इसी चमक-दमक से महज कुछ दूरी पर स्थित सुशीलपुरा (वार्ड-45) में हालात ऐसे हैं कि लोग पिछले एक सप्ताह से सीवर मिला गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। नल खुलते हैं और पानी के साथ बदबू, गंदगी और बीमारी घरों में घुस जाती है। यह सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी का खुला प्रदर्शन है।

हर घर में बीमारी, हर चेहरे पर डर

इस कॉलोनी में अब कोई भी घर ऐसा नहीं बचा जहां कोई बीमार न हो। उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण आम हो चुके हैं। सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ा है, जिनकी हालत लगातार बिगड़ रही है। लोग कहते हैं कि पानी पीने के बाद ही तबीयत खराब हो रही है, लेकिन मजबूरी यह है कि कोई दूसरा विकल्प नहीं है। साफ पानी की जगह अब लोग डर पी रहे हैं।

“RO भी हार गया” — बदबू ने तोड़ दिया भरोसा

स्थानीय निवासी बिना खंडेलवाल बताती हैं कि पानी में इतनी तेज बदबू है कि उसे पीना तो दूर, कपड़े धोने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। घर में RO लगा है, लेकिन वह भी इस गंदगी को फिल्टर नहीं कर पा रहा। पानी में किचड़ जैसी गंध है और पूरे घर में उसी की बदबू फैल जाती है। यह सिर्फ पानी का संकट नहीं, बल्कि उस भरोसे का टूटना है जो लोग सिस्टम पर करते हैं।

डिस्पेंसरी बनी मरीजों का अड्डा

कॉलोनी की डिस्पेंसरी इन दिनों मरीजों से भरी पड़ी है। रूबी खान जैसी कई महिलाएं पिछले कई दिनों से उल्टी और पेट दर्द से परेशान हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, बीते एक सप्ताह में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है और ओपीडी 450 के पार पहुंच चुकी है। हालांकि इलाज के नाम पर लोगों को ORS और सामान्य दवाएं दी जा रही हैं, जिससे राहत से ज्यादा औपचारिकता पूरी होती नजर आती है।

“पानी उबालकर पी लीजिए” — सिस्टम का समाधान

स्वास्थ्य विभाग की टीमें कॉलोनी में सर्वे कर रही हैं। करीब 30 टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं और उन्हें पानी उबालकर पीने की सलाह दे रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि राजधानी के बीचों-बीच रहने वाले लोग आखिर कब तक पानी उबालकर जिंदा रहेंगे? क्या यही आधुनिक सिस्टम का समाधान है, या यह सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का एक आसान रास्ता बन गया है?

विकास के नाम पर विनाश की कहानी

इस पूरी समस्या की जड़ एक निर्माण कार्य को बताया जा रहा है। कॉलोनी में सीसी रोड बनाने के दौरान सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में मिल गया। देखते ही देखते यह समस्या पूरे इलाके में फैल गई और लोगों के घरों तक पहुंच गई। विकास का काम, जो सुविधा देने के लिए किया गया था, वही अब लोगों के लिए बीमारी का कारण बन गया है।

“गलती किसी की नहीं” — प्रशासन का क्लासिक जवाब

पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ कनेक्शन टूटने से यह समस्या हुई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। उनका दावा है कि पानी अब साफ है और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी घटना में “किसी की गलती नहीं” बताई जा रही है। यानी जनता बीमार हो जाए, लेकिन जिम्मेदारी तय न हो—यही सिस्टम का असली चेहरा है।

VIP बनाम आम आदमी — फर्क साफ दिखता है

एक तरफ VIP इलाके हैं, जहां हर सुविधा उपलब्ध है, और दूसरी तरफ वही शहर है जहां लोग गंदा पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। यह अंतर सिर्फ सुविधा का नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का है। सिस्टम जहां ध्यान देता है, वहां सब कुछ चमकता है, और जहां नहीं देता, वहां हालात सड़ने लगते हैं।

नलों से बह रही है सिस्टम की सड़ांध

सुशीलपुरा की यह कहानी सिर्फ एक कॉलोनी की नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम का आईना है। यहां पानी नहीं, बल्कि लापरवाही बह रही है। जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी और जवाबदेही नहीं आएगी, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती रहेंगी।

आज सवाल सिर्फ इतना है— क्या VIP के पड़ोस में रहने वाले लोगों को भी साफ पानी मिलना एक सपना ही रहेगा?

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