
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Islamabad एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का अहम केंद्र बनता दिख रहा है। Iran और United States के प्रतिनिधि एक ही शहर में मौजूद हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की संभावनाएं फिलहाल लगभग खत्म हो चुकी हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि तनाव कम करने की कोशिशें जारी तो हैं, मगर भरोसे की कमी अब भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
सीधे संवाद से पीछे हटता ईरान
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी कोई सीधी बैठक तय नहीं है। ईरान का रुख है कि वह अपनी बात पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाएगा। यह कूटनीतिक दूरी दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास को साफ तौर पर दिखाती है।
ट्रंप की टीम पहुंचेगी पाकिस्तान
अमेरिका की ओर से Donald Trump के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। हालांकि, उपराष्ट्रपति JD Vance इस दौर में शामिल नहीं होंगे, लेकिन अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो उनके जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान
Pakistan इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान अपने प्रस्ताव पाकिस्तान को सौंपेगा, जिसे आगे अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जाएगा। इससे यह साफ है कि बातचीत पूरी तरह “इंडायरेक्ट डिप्लोमेसी” के जरिए आगे बढ़ रही है।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
अप्रैल में हुई पिछली बातचीत के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे थे, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इस बार हालात और ज्यादा जटिल हैं, क्योंकि दोनों पक्ष अब सीधे संवाद से भी बच रहे हैं।
आगे क्या संकेत?
ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी “आक्रामक नीतियों” में बदलाव नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। वहीं इस्लामाबाद के बाद अराघची का Muscat और Moscow दौरा भी तय है, जो यह संकेत देता है कि ईरान अन्य कूटनीतिक विकल्प भी तलाश रहा है।
पूरे घटनाक्रम से साफ है कि शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन भरोसे की कमी और कड़े रुख के चलते समाधान अभी दूर नजर आता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता दोनों देशों को एक टेबल पर ला पाती है या यह गतिरोध और गहराता है।
