संसद में आज एक आवाज गूंजी… जिसने पूरे नैरेटिव को हिला दिया। “नारी शक्ति” की बात हो रही थी, लेकिन सवाल उठा—क्या ये सबके लिए है? और यहीं से शुरू हुआ असली तूफान। ये सिर्फ बहस नहीं… ये उस सिस्टम की परीक्षा है जो बराबरी का दावा करता है। सदन में सीधा हमला: “सिर्फ प्रतीक नहीं चाहिए” खुलासा तीखा था— Ikra Hasan ने सरकार को घेरते हुए कहा— महिला आरक्षण सिर्फ “symbolic” नहीं होना चाहिए। इसका फायदा हर उस महिला तक पहुंचना चाहिए जो सिस्टम के किनारे खड़ी है। यानी सवाल सीधा—representation दिखावे…
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