लखनऊ की सड़कों से लेकर ड्रेनेज सिस्टम तक—सब कुछ बदलने वाला है। ₹100.29 करोड़ की भारी-भरकम स्वीकृति के साथ शहर में 117 प्रोजेक्ट्स की शुरुआत सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि एक नए अर्बन रियलिटी की नींव रख रही है। सवाल सीधा है—क्या ये निवेश लखनऊ को अगले स्तर का स्मार्ट सिटी बना देगा या सिर्फ कागज़ों में ही सीमित रह जाएगा? क्या है पूरा प्लान? उत्तर प्रदेश सरकार की ‘त्वरित आर्थिक विकास योजना’ के तहत राजधानी लखनऊ में 117 शहरी अवसंरचना परियोजनाओं को ₹100.29 करोड़ की मंजूरी दी गई है। इस…
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लखनऊ की पुकार: मैं लखनऊ हूँ, सांस नहीं ट्रैफिक ले रहा हूँ…
मैं लखनऊ हूँ — तहज़ीब की ज़ुबान, नवाबों की जान। कभी मेरी गलियाँ पतली थीं, मगर दिल बड़े थे। ना हॉर्न का शोर था, ना धुएं का जहर। आज चौड़ी सड़कें हैं, लेकिन हालत ये है कि गाड़ियाँ रेंगती हैं, और लोग झुंझलाते हैं। बैरिकेडिंग का खेल: ट्रैफिक लाइट गई तेल लेने जब बैरिकेडिंग ही लगानी थी, तो ये ट्रैफिक लाइट्स क्यों टाँगी गईं?बुद्धा पार्क से हनुमंत धाम, हजरतगंज से लेकर केडी सिंह बाबू स्टेडियम तक, नहरिया जाम- हर 500 मीटर पर लगता है नया जाम। कट कभी खुलता है,…
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