सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी — “Insensitive Remarks? Not Allowed!”

उच्चतम न्यायालय ने एक बार फिर बता दिया कि न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए!यौन हमलों से जुड़े मामलों में असंवेदनशील न्यायिक टिप्पणियाँ अदालतों, पीड़ितों और समाज—तीनों को हिला देती हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना, कपड़े उतारने की कोशिश या पायजामे का नाड़ा तोड़ना “रेप की कोशिश नहीं” है!अब भला इसमें और क्या रह गया?—यही तो देश भर में सवाल उठ रहा है। “रात का समय…

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कृष्ण जन्मभूमि बनाम ईदगाह मस्जिद — कोर्ट में फिर गूंजे शंख और सुबूत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर डेढ़ घंटे तक गहन बहस चली। यह सुनवाई अब धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुंच रही है जहां अदालत मामले के मुख्य बिंदुओं को तय करने जा रही है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दाखिल अमेंडमेंट एप्लीकेशन पर तर्क रखे गए, जबकि माता रुक्मिणी देवी की वंशज नीतू चौहान की ओर से रिज्वाइंडर एफीडेविट दाखिल किया गया। अगली तारीख 12 दिसंबर — अदालत तय करेगी केस के बिंदु न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की…

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“न्याय के दरवाज़े पर जांच की दस्तक!” – जस्टिस वर्मा पर लगे गंभीर आरोप

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद में बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव पर जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 की धारा 3(2) के तहत गठित की गई है और इसका मकसद है— आरोपों की गंभीरता और वैधता की जांच। कौन हैं समिति के सदस्य? जस्टिस अरविंद कुमार – हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव – मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीवी आचार्य…

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